टेक्नोलॉजी: टेक्नोलॉजी काफी तेजी से विस्तार हो रहा है। आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के काम करने के तरीकों को काफी आसान बनाया है परंतु अब कई देशों में एआई के लिए कई सख्त नियम बना दिए हैं परंतु अब हैरान करने वाली एक स्टडी सामने आई है। इसके अंतर्गत एआई पर ज्यादा सख्ती भी लोगों को भारी पड़ेगी।
कंपनियों पर की जा रही है सख्ती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये स्टडी अमेरिका की कॉर्नल यूनिवर्सिटी और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है। उनका यह कहना है कि AI नियमों में जिम्मेदारी उन कंपनियों पर ज्यादा डाली जा रही है। वहीं जो एआई का इस्तेमाल करके ऐप्स या दूसरी जरुरी सर्विसेज बनाती है परंतु ऐसा नहीं होना चाहिए। दरअसल ज्यादा ध्यान उन कंपनियों पर देने की जरुरत है जो एआई मॉडल को तैयार कर रही है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने यह भी माना है कि यदि एआई बनाने वाली कंपनियों को ये पता चल जाता है कि प्रोडक्ट की सेफ्टी की जिम्मेदारी आखिरी में तय होगी। इसकी सेफ्टी पर कम ध्यान देने लगती हैं और इसे ज्यादा बिना टेस्ट के ही छोड़ देते हैं।
आखिर क्या होगा नया खतरा?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नई स्टडी में फ्री राइड़िंग का भी जिक्र किया गया है। इसका अर्थ है कि एक पक्ष ये मानकर चलता है कि दूसरा पक्ष पूरी जिम्मेदारी निभा लेगा। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में यदि देखें तो ये कहा जा सकता है कि एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियां उसकी सेफ्टी की चिंता डेवलपर्स पर छो़ड सकती है। ऐसे में सेफ्टी को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आ सकती है। यह आगे आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बन सकती है। ये स्टडी पूरी दुनिया में कंपनियों के लिए एक बड़ी चिंता बन चुका है। ऐसे में एआई पर ज्यादा सख्ती भी लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
ऐसे में आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एआई को पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है परंतु इस पर लागू होने वाले नियमों पर भी ध्यान देने की जरुरत है। इससे यूजर्स की सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा पाए। इसके साथ ही बता दें कि डेवलपर्स को सेफ्टी का इतना ध्यान रखा जा पाए। इसके साथ ही बता दें कि डेवलपर्स को सेफ्टी का इतना ध्यान नहीं रहता है। इसका फायदा कंपनियां उठा लेती है।

