यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के लोगों ने सांप्रदायिक ताकतों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है और धर्मनिरपेक्षता तथा आम आदमी पार्टी के पक्ष में जोरदार फैसला सुनाया है। भीषण गर्मी के बावजूद लोग लोकतंत्र की रक्षा के लिए वोट डालने बाहर निकले, जो बेहद उत्साहजनक संकेत है।” पिछले चार वर्षों के दौरान पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि समाज के हर वर्ग के लोग लगातार ‘आप’ और उसकी नीतियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “आप ने लगभग 13,000 पंचायतों में से 11,000 से अधिक पंचायत सीटें जीती थीं। जालंधर लोकसभा सीट के उपचुनाव, चार विधानसभा सीटों, जिला परिषदों, ब्लॉक समितियों और अब नगर परिषदों तथा नगर पंचायतों के चुनावों ने साबित कर दिया है कि ‘आप’ के लिए जनता का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों की संयुक्त ताकत भी ‘आप’ को मिले समर्थन का मुकाबला करने में विफल रही। उन्होंने कहा, “कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा, जिसे मैं ई.डी. पार्टी कहता हूं, सभी मिलकर भी ‘आप’ द्वारा जीती गई सीटों की संख्या तक नहीं पहुंच सके। लोगों ने उनके नकारात्मक और विभाजनकारी एजेंडे को पूरी तरह नकार दिया है। यहां तक कि शहरी क्षेत्रों में भी, जिन्हें भाजपा अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती है, मतदाताओं ने उन्हें बुरी तरह खारिज कर दिया है।”
भाजपा के प्रदर्शन का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा 1,000 से अधिक सीटों पर अपनी जमानत तक नहीं बचा सकी। इतना ज्यादा प्रचार करने के बावजूद वह इन चुनावों में पांचवें स्थान पर रही है। कई जगहों पर तो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी भाजपा से अधिक सीटें जीती हैं। ऐसा लग रहा था जैसे भाजपा केवल ‘नोटा’ से मुकाबला कर रही हो।” मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आप’ ने चुनावों में व्यापक जनादेश हासिल किया है और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि 2027 में ‘आप’ का रास्ता और मजबूत होता जा रहा है। लोगों ने उन्हें भी सबक सिखाया है, जिन्होंने ‘आप’ नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लिए ई.डी. और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की कोशिश की थी।”
पार्टी छोड़कर जाने वाले ‘आप’ के पूर्व राज्यसभा सदस्यों पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जिन लोगों ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने का रास्ता चुना, उन्हें जनता ने जवाब दे दिया है। उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए और सोचना चाहिए कि उन्होंने क्या हासिल किया है, क्योंकि पंजाब के लोगों ने उन्हें नकार दिया है।”हल्कावार नतीजों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनादेश पूरे पंजाब में ‘आप’ के लिए मजबूत समर्थन को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पैतृक हलके गिद्दड़बाहा में ‘आप’ ने 19 में से 17 सीटें जीतीं। बरनाला, जो नव-नियुक्त पंजाब भाजपा अध्यक्ष से संबंधित है, वहां भाजपा कहीं मुकाबले में ही नहीं थी, जबकि ‘आप’ ने 50 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पार्टी की नीतियों को मिल रहा समर्थन राज्य के सभी क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। “मेरे अपने धूरी विधानसभा क्षेत्र में ‘आप’ ने 21 में से 19 सीटें जीती हैं। विपक्षी दलों ने शायद कुछ इक्का-दुक्का जगहों पर जीत हासिल की हो, लेकिन ‘आप’ ने दोआबा, माझा और मालवा सभी क्षेत्रों में जीत दर्ज की है। लोगों ने मुफ्त बिजली, आम आदमी क्लीनिक, किसानों के लिए दिन में बिजली आपूर्ति, गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के पक्ष में वोट दिया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बड़ी जीत का पैमाना समाज के हर वर्ग के व्यापक समर्थन को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हर किसी ने ‘आप’ को वोट दिया है, जिसके कारण पार्टी ने 90 प्रतिशत से अधिक सीटें जीती हैं। कांग्रेस और अकाली दल हार के बाद शिकायतें करने की अपनी पुरानी आदत जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें जनता के फैसले को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए। कई जगहों पर तो उन्हें चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिले।” इन चुनावों को एक बड़े राजनीतिक सफर की शुरुआत बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये नतीजे सिर्फ एक शुरुआत हैं। ‘आप’ विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति को और मजबूत करना तथा अधिक सीटें जीतना जारी रखेगी। भगवान की कृपा से सुनील जाखड़ ने सही समय पर अपना पद छोड़ दिया। दूसरी ओर राजा वड़िंग को दिल्ली में अपनी पार्टी नेतृत्व की बैठक के दौरान कठिन सवालों का सामना करना पड़ेगा।” मतदान के दौरान केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के व्यवहार के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा, “मतदान वाले दिन जो ड्रामेबाजी देखने को मिली, वह अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण थी। ऐसा व्यवहार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता।” मतदान प्रणाली पर उठाए गए सवालों के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कुछ पार्टियां जब भी हारती हैं तो वे बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों पर सवाल उठाती हैं। भारत निर्वाचन आयोग को ईवीएम को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”

