Breaking Newsचीन-ताइवान में जंग छिड़ी तो मुश्किल में आएंगी कार और मोबाइल कंपनियां

चीन-ताइवान में जंग छिड़ी तो मुश्किल में आएंगी कार और मोबाइल कंपनियां

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दशकों से चल रहा चीन-ताइवान विवाद एक बार फिर से गहराने लगा है। ड्रैगन लगातार गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है। सारी दुनिया को इस बात की चिंता सता रही है कि अगर चीन ने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की तो कहीं उनके अपने देश की रफ्तार धीमी न हो जाए। क्योंकि, ताइवान में पूरी दुनिया का लगभग 60 फीसदी सेमीकंडक्टर का उत्पाद होता है। सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, स्मार्टफोन और कारों के सेंसर में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इससे दुनियाभर की कार और मोबाइल कंपनियां भी मुश्किल में पड़ सकती हैं।

चिप की पहले से है कमी 

ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का कहना है कि ताइवान में युद्ध जैसे हालात बनते हैं तो यह पूरी दुनिया की टेक्नोलॉजी के लिए एक बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकता है। पहले ही कोरोना महामारी के बाद से ऑटो से लेकर स्मार्टफोन इंडस्ट्री चिप की कमी से जूझ रही है। ताइवान में स्थिति बिगड़ने पर यह संकट और गंभीर हो सकता  है, क्योंकि यह छोटा देश सेमीकंडक्टर बनाने के मामले में दुनिया की फैक्ट्री है। ताइवान को दुनिया का टेक पावर हाउस भी कहा जाता है। ऐसे में अगर ये फैक्ट्रियां बंद होती हैं, तो पूरी दुनिया में मोबाइल और ब्रेक सेंसर की भारी किल्लत हो सकती है।

सेमीकंडक्टर के उत्पादन में ताइवान ऐसे बना अग्रणी 

– ताइवान ने खुद को सेमीकंडक्टर के उत्पादन में आगे लाने की शुरुआत साल 1985 में ही कर दी थी।
– ताइवान की सरकार ने मॉरिस चांग को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को तैयार करने का काम सौंपा।
– साल 1987 में ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) की स्थापना हुई।
– आज यह दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी है।
– टीएसएमसी एक समय वैश्विक बाजार की 92% डिमांड पूरी कर रही थी।
– दूसरे स्थान पर काबिज दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग की हिस्सेदारी महज 8% पर सीमित थी।

दिग्गज कंपनियां भी ताइवान पर निर्भर 

कोरोना महामारी का सबसे बुरा असर ताइवान की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर पड़ा। हालांकि इसके बाद भी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में ताइवान का दबदबा बरकरार है। ताइपेई स्थित रिसर्च फर्म ट्रेंडफोर्स के अनुसार, साल 2020 में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के कुल वैश्विक रेवेन्यू में ताइवान की कंपनियों की हिस्सेदारी 60 फीसदी से अधिक रही। इसमें दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनी टीएसएमसी का योगदान रहा।

चीन से मीलों आगे है ताइवान 

साल 2020 में रेवेन्यू के लिहाज से ताइवान की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी पहले पायदान पर थी। दूसरे नंबर पर भी ताइवान की ही एक अन्य कंपनी यूएमसी का कब्जा था। तीसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग थी। इसके बाद चौथे स्थान पर अमेरिकी कंपनी ग्लोबल फाउंड्रीज थी। चीन की कंपनी एसएमआईसी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में पांचवें नंबर की कंपनी थी। 

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