ऊना/बंजार (कुल्लू)/सुशील पंडित: देवभूमि हिमाचल की समृद्ध संस्कृति और अटूट आस्था का अद्भुत संगम शनिवार को बंजार के बलागाड़ में देखने को मिला। यहां आदि शक्ति मां वल्ले दुर्गा और महर्षि मार्कण्डेय के नवनिर्मित रथों की पावन प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन वड़े ही हर्षोल्लास और दिव्य भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से उपस्थित होकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया और समस्त क्षेत्र व प्रदेश के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं मंगल की प्रार्थना की। कार्यक्रम में पहुंचने पर स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी ने पूर्व मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और देव समाज की ओर से उनका आभार प्रकट किया।
इस दिव्य आयोजन में मां दुर्गा, महर्षि मार्कण्डेय (बलागाड़) और ऋषि मार्कण्डेय (पेड़चा) के रथों के मिलन ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि देव संस्कृति के संरक्षण के लिए इस प्रकार के भव्य आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि अपनी अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद जयराम ठाकुर का देव समाज के बीच पहुंचना उनकी अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाता है। इस दौरान पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर सहित भारी संख्या में भक्तों का जमावड़ा रहा, जहां श्रद्धा और विश्वास का एक अनूठा संगम देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में ‘अठारह करडू की जय-जयकार’ के उद्घोष से वातावरण पूरी तरह देवमय हो गया।
जनसभा को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि देव परंपराएं, देव आस्थाएं और देव अवस्थाएं हमारी विशिष्ट पहचान हैं। उन्होंने गौरव के साथ उल्लेख किया कि हम पहाड़ी लोग सदियों से देव संस्कृति से जुड़े रहे हैं और यही संस्कार हमारी सामाजिक एकता और आत्मिक शक्ति का मुख्य आधार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। अपनी पहचान को भूलना समाज और संस्कृति दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के विभिन्न हिस्सों और विशेषकर महानगरों में सनातन संस्कृति व धार्मिक आस्थाओं पर योजनाबद्ध तरीके से प्रहार किए जा रहे हैं। ऐसे समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। उन्होंने सीमित संसाधनों और कठिनाइयों के बावजूद मेला समिति द्वारा किए गए भव्य आयोजन की सराहना की और समिति के सभी सदस्यों को उनकी अटूट श्रद्धा के लिए बधाई दी।
अयोध्या का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि पाँच वर्षों के लंबे संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। श्रीराम मंदिर हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना का गौरवशाली प्रतीक है। इसी भावना के साथ हमें अपने स्थानीय देवस्थलों के प्रति भी समर्पित रहना चाहिए। अंत में उन्होंने ईश्वर से प्रदेशवासियों की आपदाओं से रक्षा करने और मां वल्ले दुर्गा व महर्षि मार्कण्डेय की कृपा सभी पर बनाए रखने की कामना की। आयोजन समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों को सम्मानित किया और इस सफल देव कारज के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर देव समाज से देवता मार्कण्डेय ऋषि मंगलौर के प्रतिनिधि पुरुषोत्तम शर्मा, कारदार मार्कण्डेय ऋषि बलागाड चुनी लाल शर्मा, श्रवण शर्मा, देव समाज से दोत राम, ठाकुर चंद महंत, सत्यदेव शर्मा सहित कई देवताओं के कारदार उपस्थित रहे।
माँ वल्ले दुर्गा और महर्षि मार्कण्डेय के नवनिर्मित रथों की प्राण-प्रतिष्ठा में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर
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