जालंधर, ENS: कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के पिता भगत चुन्नी लाल का आज सुबह 93 साल की उम्र में निधन हो गया। इस दुखद खबर को लेकर राजनीति गलियारे में शोक की लहर छा गई। जिसके बाद कई दिग्गज नेता सहित डिप्टी कमिशनर वरजीत वालिया और पुलिस कमिशनर सतिंदर सिंह कैबिनेट मंत्री के घर दुख सांझा करने पहुंचे। भगत चुन्नी लाल का अंतिम संस्कार शाम करीब 5 बजे बस्ती शेख श्मशानघाट में किया जाएगा।
View this post on Instagram
वहीं पंजाब सरकार ने पूर्व मंत्री भगत के निधन पर शोक स्वरूप सरकारी दफ्तरों में आज आधे दिन की छुट्टी का ऐलान किया है। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस कमिशनर सतिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक के साथ-साथ अच्छा सामाजिक जीवन व्यतीत किया। वह अक्सर लोगों की सेवा करते थे। उनके अचानक निधन होना दुखद खबर है। वह कैबिनेट मंत्री के पद पर सेवाएं दे चुके है। ऐसे में आज वह परिवार के साथ दुख सांझा करने पहुंचे है।
वहीं डिप्टी कमिशनर वरजीत वालिया ने कहा कि आज सुबह ही उन्हें पूर्व कैबिनेट मंत्री के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। जिसके बाद वह कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के घर पर उनके पिता व पूर्व कैबिनेट मंत्री के भगत चुन्नी लाल के निधन को लेकर दुख सांझा करने पहुंचे। वह काफी अच्छे इंसान थे और उन्होंने लोगों के लिए काफी सेवाएं दी। ऐसे उनके निधन पर परिवार के साथ दुख सांझा करने पहुंचे है। उन्होंने भगवान से परिवार को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की अपील की है और दिवगत आत्मा को अपने चरणों में रखने के लिए भगवान से प्रार्थना की।
गौर हो कि राजनीतिक सफर की शुरुआत में भगत चुन्नी लाल ने 1985 में जालंधर दक्षिण सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए।
1997 में उन्होंने जालंधर दक्षिण सीट से पहली बार चुनाव जीता और पंजाब विधानसभा पहुंचे। 2007 में वह इसी सीट से दूसरी बार विधायक चुने गए। इसके बाद परिसीमन के कारण यह क्षेत्र जालंधर पश्चिम बन गया। 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जालंधर पश्चिम से चुनाव लड़ा और फिर जीत दर्ज की। भगत चूनी लाल अकाली-भाजपा गठबंधन वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके है। उनका जन्म 1 दिसंबर 1932 को सियालकोट (मौजूदा पाकिस्तान) में हुआ था। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद उनका परिवार जालंधर में आकर बस गया था। उनका स्पोर्ट्स गुड्स के निर्यात का कारोबार था। उनके चार बेटे और चार बेटियां हैं। जालंधर वेस्ट की राजनीति में लंबे समय तक प्रमुख चेहरा रहे।
उन्होंने 1997 में पहली बार चुनाव जीता था और विधानसभा पहुंचे। 2017 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था। अपने राजनीतिक करियर के दौरान भगत चुन्नी लाल ने कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली। 2011 में सतपाल गोसाईं के इस्तीफे के बाद उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) चुना गया। 2012 से 2017 तक वह प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, श्रम तथा वन एवं वन्यजीव मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। इसके अलावा, 2012 से 2017 तक वह पंजाब विधानसभा में बीजेपी विधायक दल के नेता भी रहे। इसके बाद उन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया।