चंडीगढ़: हरियाणा में जल एवं वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, गांवों में अपशिष्ट जल प्रबंधन, बायोगैस, पराली प्रबंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और हरित क्षेत्र बढ़ाने के कार्यों को गति दी जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने यमुना एक्शन प्लान तथा दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की और विभिन्न विभागों को निर्धारित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
यमुना एक्शन प्लान की समीक्षा के दौरान यमुना बेसिन में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, गांव स्तर पर अपशिष्ट जल प्रबंधन और बायोगैस परियोजनाओं की जिलेवार प्रगति की समीक्षा की गई। अंबाला, फरीदाबाद, रोहतक, गुरुग्राम और करनाल के मंडलायुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए प्रस्तावित सीईटीपी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में प्रस्तावित 50 एमएलडी सीईटीपी के लिए 10 अगस्त को निविदाएं आमंत्रित की गई थीं और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 14 सितंबर है।
दिल्ली एवं एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए चिन्हित उपायों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, धूल एवं कचरे से होने वाले प्रदूषण, पराली जलाने की रोकथाम तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।