नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच में जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही। इसी बीच अमेरिका ने बाकी देशों पर ईरान की मदद न करने का दबाव बना दिया है। ट्रंप ने यह चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान की मदद करेगा उनको भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने फारस की खाड़ी में सैन्य मौजूदगी को आक्रामकता का समर्थन भी बताया है। इससे जुड़ा एक पोस्ट भी उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
गंभीर होंगे नतीजे
इस्माइल बघाई ने कहा है कि – ‘ईरान और कोरिया गणराज्य के बीच संबंध 64 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। दोनों देशों के बीच में रिश्ते हमेशा आपसी सम्मान के आधार पर ही विकसित होंगे। ईरान, कोरिया, गणराज्य के साथ अपने दोस्ती भरे संबंधों को भी खास महत्व देता है। ईरानी लोग अमेरिकी की आक्रामक कार्रवाईयों का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे हालत में अब महिलाओं औऱ बच्चों के खिलाफ अमेरिका के युद्ध अपराधों का डटकर जवाब भी दे रहे हैं। ऐसे में फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरुमध्य में किसी भी दूसरे देश की सैन्य मौजूदगी वहां के अभियानों में हिस्सा लेने के सीधे तौर पर आक्रामकता करने वालों का साथ देना ही माना जाएगा। इसके नतीजे भी गंभीर होंगे’।
이란과 대한민국의 관계는 64년이 넘는 역사를 지니고 있으며, 양국 관계는 줄곧 상호 존중을 바탕으로 발전해 왔습니다. 이란은 대한민국과의 우호 관계를 매우 중요하게 여기고 있습니다.
그러나 현재 이란 국민이 미국의 침략적 행위에 맞서 자위하고 있으며, 여성과 어린이를 상대로 한 미국의… pic.twitter.com/ThlIXzIyIN
— Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) September 7, 2026
अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे
उनका कहना है कि – ‘किसी भी संप्रभु और जिम्मेदार देश को अमेरिका के दबाव और धमकियों के आगे नहीं झुकना चाहिए। इसके अलावा ईरान लोगों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाईयों और भयानक अपराधों में शामिल नहीं होना चाहिए। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के गठबंधन से 28 फरवरी को हमला शुरु किया गया था’। इसके बाद युद्ध को 6 महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अमेरिका ईरान पर हमला करने से भी पीछे नहीं हट रहा। वहीं दूसरी ओर ईरान भी इन सभी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। अमेरिका ने अब हाल ही में ईरान के 3 कच्चे जहाज लेकर जा रहे सभी जहाजों को निशाना बनाया था। अमेरिका ने ये हमला तब किया था जब ईरान ने अमेरिका के दो युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी थी।