अमृतसरः बस स्टैंड के पास स्थित शहीद भगत सिंह मार्केट जिसे IDH मार्केट भी कहा जाता है, उसमें एक दुकान को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया है। मामला दुकान के मालिकाना हक, किराएदारी और पार्टनरशिप से जुड़ा है। दोनों पक्ष अपने-अपने हक में दावा कर रहे है, जिसके बाद मामला पुलिस चौकी पहुंच गया।
दुकान का मालिक होने का दावा करने वाले पवन कुमार ने कहा कि दुकान उनके पिता बलविंदर कुमार उर्फ बब्बा ने किराए पर ली थी। उनके मुताबिक किराएदारी 2010 में शुरू हुई थी और 2017 में किराएदारी रिन्यू हुई थी। पवन कुमार का कहना है कि साल 2018 में दोनों के बीच बिजनेस पार्टनरशिप हुई थी, जिसके लिए पेपरवर्क भी हुआ था।
पवन कुमार ने दावा किया कि पार्टनरशिप के तहत बैग, अटैची, ट्रॉली बैग और स्कूल बैग वगैरह का बिजनेस होता था। उनका आरोप है कि साल 2024-25 के दौरान दूसरी पार्टी ने कथित तौर पर कॉर्पोरेशन के साथ मिलीभगत करके दुकान को अपने नाम पर रजिस्टर करवाने की कोशिश की। जब उन्होंने अकाउंट्स मांगे, तो दूसरी पार्टी ने किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन को मानने से मना कर दिया।
पवन कुमार ने दावा किया कि उन्हें 2018 के बाद से किराया नहीं दिया गया है और करीब 8 साल का किराया पेंडिंग है। उनके मुताबिक पार्टनरशिप का अकाउंट भी उन्हें नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की घटना के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस से इंसाफ की मांग की है कि इस बारे में पुलिस कमिश्नर और रामबाग एसएचओ को एक पत्र दिया है। इस मामले में भगवान वाल्मीकि एकता संघर्ष मोर्चा के चेयरमैन संदीप सिंह जंडियाला भी पवन कुमार के स्पोर्ट में पुलिस चौकी पहुंचे।
संदीप सिंह के मुताबिक दोनों पार्टियों को पुलिस ने बुलाया और डॉक्यूमेंट्स दिखाने को कहा। संदीप सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस को अपने डॉक्यूमेंट्स दिखाए, जबकि दूसरी पार्टी ने उस समय कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं दिखाए। उनके मुताबिक पुलिस ने दूसरी पार्टी को अपने डॉक्यूमेंट्स दिखाने के लिए अगले दिन सुबह 10 बजे तक का समय दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक मामले की जांच नहीं हो जाती, दुकानें बंद रखने की बात कही है।
मार्केट के दुकानदार राजेश कुमार ने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक, यह बिल्डिंग बलविंदर कुमार उर्फ बब्बा की है और वह खुद किराएदार हैं। उन्होंने कहा कि बलविंदर कुमार की मौत के बाद उनकी पत्नी को किराए पर दिया गया है। राजेश कुमार ने कहा कि मालिकाना हक का असली फैसला डॉक्यूमेंट्स के आधार पर ही हो सकता है और मालिकाना हक का दावा करने वाली पार्टी को अपने डॉक्यूमेंट्स पेश करने चाहिए। पुलिस अधिकारी ने साफ किया कि दुकान को लेकर दोनों पार्टियों के बीच यह पुराना झगड़ा है। पुलिस ने दोनों पार्टियों को चौकी पर बुलाकर उनके डॉक्यूमेंट्स मांगे हैं।