अमृतसरः शहर में SIR सर्वे को लेकर बड़ा विवाद हो गया। वोटर वेरिफिकेशन और SIR सर्वे को लेकर एडवोकेट सिमरजीत कौर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि सर्वे के दौरान कई परिवारों और लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब के पुराने मतदाताओं के नाम सूचियों में से हटाए जा रहे हैं, जबकि बाहर से आए लोगों के वोट बनाए जा रहे हैं। एडवोकेट सिमरजीत कौर ने बताया कि उनके पास 10वीं कक्षा की डीएमसी, बैंक पासबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड सहित ज़रूरी दस्तावेज़ मौजूद हैं।
इसके बावजूद उनका दावा है कि नाम में गलती का हवाला देकर उनका वोट रद्द कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी व्यक्ति की पहचान से संबंधित दस्तावेज़ मौजूद हैं तो सिर्फ नाम संबंधी गलती के आधार पर वोट क्यों काटा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह मामला सिर्फ़ उनके तक सीमित नहीं है। उनके परिवार के तीन सदस्यों के वोट काटे गए हैं, जबकि उनकी कॉलोनी में भी करीब 160 लोगों के वोट काटे जाने की बात सामने आई है। उन्होंने फरीदकोट इलाके से भी हज़ारों वोट काटे जाने का दावा किया। एडवोकेट सिमरजीत कौर ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पंजाबियों के वोट काटकर बाहरी लोगों के वोट बनाए जा रहे हैं।
हालांकि यह उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन दावों पर संबंधित चुनाव अधिकारियों या प्रशासन का पक्ष सामने आना भी ज़रूरी है। उन्होंने ऐसे सभी लोगों से एकजुट होने की अपील की, जिनकी वोट दस्तावेज़ पूरे होने के बावजूद काटी गई है। उन्होंने कहा कि यदि ज़रूरत पड़ी तो वे पीड़ित लोगों की आवाज़ बनकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही एडवोकेट सिमरजीत कौर ने वोटर वेरिफिकेशन प्रणाली में सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि वोटर की पहचान की पुष्टि के लिए फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जैसी प्रणाली लागू की जानी चाहिए, ताकि किसी ज़िंदा और योग्य वोटर का वोट का हक़ गलत तरीके से प्रभावित न हो। अब देखना होगा कि एडवोकेट सिमरजीत कौर द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर चुनाव विभाग और संबंधित प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।