जालंधर, ENS: पंजाब में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी और भारत के पूर्व राजदूत 75 वर्षीय रमेश चंद्र को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने और मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने का नोटिस जारी किया गया है। चंद्र ने कहा कि वह अपना आधार, वोटर आईडी और अन्य आवश्यक दस्तावेज पहले ही बीएलओ को जमा करवा चुके हैं। चंद्र को प्राप्त नोटिस में कहा गया है कि उनके द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेज उन्हें मतदाता के रूप में स्थापित करने के लिए अपर्याप्त हैं और एस.आई.आर. (SIR) के बाद उनके मतदाता विवरण अंतिम मतदाता सूची से मेल नहीं खाते।
वहीं डिप्टी कमिशनर वरजीत वालिया ने कहा रमेश चंद्र को प्राप्त नोटिस एक औपचारिक प्रक्रिया को दर्शाता है, इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। पोर्टल के लिए आवश्यक विवरणों के अनुसार एसओपी (SOPs) का पालन किया जाता है। अब तक दो श्रेणियों के मतदाता छूट गए हैं – वे जो बिना मैप किए गए हैं या जिनमें लॉजिकल खामियां हैं। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बीएलओ को हमारे सामान्य दिशानिर्देशों के अनुसार, उनके आवश्यक दस्तावेज उनके घर से एकत्र किए जाएंगे और उन्हें किसी भी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं है।
उधर, देओल नगर के निवासी व पूर्व राजदूत रमेश चंद्र ने बताया कि वह एशिया, अफ्रीका और यूरोप में विभिन्न राजनयिक पदों पर सेवा दी है और वे पिछले कई सालों से जालंधर से मतदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले ही बीएलओके साथ आवश्यक दस्तावेज साझा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें 27 अगस्त को लाडोवाली रोड स्थित एक कार्यालय में अतिरिक्त सबूतों के साथ पेश होने का नोटिस मिला है। चंद्र ने कहा, “सेवानिवृत्त होने के बाद, मैंने विभिन्न चुनावों में जालंधर से मतदान किया है। उन्होंने 2007, 2012, 2014, 2017, 2022 और 2024 में वोट डाला। चंद्र के अनुसार फिर भी उन्हें मतदाता सूची के लिए अपनी नागरिकता सत्यापित करने हेतु निवास प्रमाण के साथ पेश होने के लिए तलब किया गया है। चंद्र ने कहा कि जहां पंजाब में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया था, वहीं उनसे नागरिकता के प्रमाण की पुष्टि करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जबकि वह लगातार मतदान करते आ रहे हैं।
उन्होंने इशारा किया कि 2003 में, वह जापान में सेवा दे रहे थे, इसलिए वह विदेश में तैनात थे। चंद्र का जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ है और यहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह अब सेवानिवृत्ति के बाद पिछले 15 सालों से जालंधर में रह रहे हैं। चंद्र ने कहा, वह नवदीप सूरी के मामले के बारे में पढ़ रहा था और मुझे व्यंग्यात्मक रूप से पता चला कि मैं भी उसी नाव में सवार हूं। खास तौर पर, रमेश चंद्र दूसरे ऐसे भारतीय राजदूत हैं जिन्हें मतदाता के रूप में सूचीबद्ध रहने के लिए अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कहा गया है।
इससे पहले प्रसिद्ध पंजाबी उपन्यासकार नानक सिंह के पोते और भारतीय राजदूत नवदीप सूरी को भी ऐसा ही नोटिस मिला था। दिसंबर 2010 में सेवानिवृत्त हुए, रमेश चंद्र ने बेलारूस में भारत के राजदूत के रूप में सेवा निभाई और जापान में भारत के काउंसलर; एडिनबर्ग, यूके में भारत के कौंसल जनरल, और प्राग में भारतीय दूतावास में मंत्री के तौर पर भी पद संभाले। वहीं डिप्टी कमिशनर ने कहाकि पंजाब में बिना मैप किए गए मतदाताओं के लिए एसआईआर फॉलो-अप सत्यापन 12 सितंबर, 2026 तक चलेगा, जिसके बाद 12 अक्टूबर, 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। चुनाव सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के बाद, राज्य के 20.69 लाख (लगभग 10 प्रतिशत) मतदाता बिना मैप किए रह गए हैं। जालंधर में 1.46 लाख मतदाता अभी भी बिना मैप किए हुए हैं।