अमृतसरः जमीनी विवाद को लेकर अमृतपाल सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अमृतपाल सिंह ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने विरोधी पक्ष द्वारा कुछ दिन पहले की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में की और अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में अपना पक्ष रखा। अमृतपाल सिंह ने कहा कि मामला जमीनी विवाद से संबंधित है। उनके अनुसार सरदार सुखदेव सिंह और सरदार दया सिंह द्वारा यह बात कही गई थी कि वह जबरदस्ती जमीन जोत रहे हैं। अमृतपाल सिंह ने कहा कि जिस जमीन की बात की जा रही है, वह पिछले लगभग 60 सालों से उनके परिवार के पास है और यह जमीन उन्हें अपने पिता की मलकियत से पारिवारिक हिस्से के अनुसार मिली है।
उन्होंने कहा कि जमीन की मलकियत और कब्जे संबंधी उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं और वह जरूरत पड़ने पर अदालत में सारे सबूत पेश करेंगे। अमृतपाल सिंह ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ 80 से 84 लाख रुपये तक की रकम संबंधी आरोप लगाए जा रहे हैं, जिन्हें वह सिरे से नकारते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनके बैंक खातों या एफडी संबंधी कोई शंका है तो बैंक मैनेजर के पास जाकर जांच कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसी का एक रुपया भी उनके पास नहीं है और वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
इसके अलावा अमृतपाल सिंह ने अपने ऊपर 150 व्यक्तियों को लाने के लगे आरोपों को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि जिस समय की यह बात की जा रही है, उस वक्त वह खुद मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने पुलिस प्रशासन को सात दिन का समय देते हुए कहा कि उनके खिलाफ दर्ज किए गए पर्चों को रद्द किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो वह अदालत का रुख करने के साथ-साथ मानहानि का केस दर्ज करवाएंगे। उन्होंने अपनी जान को भी खतरा होने की बात कही। इस मौके पर एक अन्य बुजुर्ग व्यक्ति ने भी विरोधी पक्ष द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि वहां 150 व्यक्तियों की बात की गई, जबकि असल में मौके पर सिर्फ 5 से 7 व्यक्ति ही मौजूद थे। उन्होंने एफआईआर में दर्ज नामों का हवाला देते हुए भी इस दावे पर सवाल खड़े किए। बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि मौजूदा मंत्री के दबाव के तहत पुलिस प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों के कारण उनका समाज और सरकार में बुरा नाम बन रहा है, जबकि उनके अनुसार अदालत द्वारा मामला पहले ही रद्द किया जा चुका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों पक्षों द्वारा अपने-अपने पक्ष रखे गए। मामले में जमीन की मिल्कियत, कब्जे, पैसों और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद बरकरार है।

