प्रशासन को दिया 4 दिन का अल्टीमेटम
अमृतसरः सड़क हादसे के बाद एक निजी अस्पताल में इलाज के अधीन 21 वर्षीय युवक की मौत के मामले में पीड़ित परिवार ने एक बार फिर इंसाफ की मांग उठाई है। युवक की मौत से पांच दिन बाद परिवार और इलाके के लोगों द्वारा प्रेस वार्ता करके पुलिस प्रशासन और निजी अस्पताल की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
पीड़ित मां बबीता सहोता ने बताया कि 8 तारीख को उनका 21 वर्षीय बेटा एक्टिवा पर जा रहा था, जब कथित तौर पर पीछे से आए वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हादसे के बाद युवक को इलाज के लिए निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां 16 तारीख को उसकी मौत हो गई।
परिवार का आरोप है कि हादसे संबंधी पहले ही पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परिवार के मुताबिक युवक की मौत के बाद ही पुलिस हरकत में आई। उनका दावा है कि मौत को 5 दिन बीतने के बावजूद हादसे के जिम्मेदार व्यक्तियों की न गिरफ्तारी हुई है और न ही परिवार को जांच की प्रगति के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी दी गई है। पीड़ित परिवार ने निजी अस्पताल के इलाज पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान कथित लापरवाही बरती गई और गलत इंजेक्शन दिए गए।
परिवार ने मांग की कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करके यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। बबीता सहोता ने आरोप लगाया कि परिवार पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहता था, लेकिन उनसे हस्ताक्षर करवाकर पोस्टमार्टम करवाया गया। उन्होंने कहा कि अपने इकलौते बेटे की जान बचाने के लिए परिवार ने गहने तक बेचे और ब्याज पर पैसे लेकर इलाज कराया, लेकिन इसके बावजूद वह अपने बेटे को नहीं बचा सके। पीड़ित मां ने कहा कि वह आम आदमी पार्टी की समर्थक रही है और पार्टी के लिए काम भी किया, पर इस दुख की घड़ी में उनकी सुनवाई न होने के कारण परिवार निराश है।
परिवार और इलाके के लोगों ने अब पुलिस प्रशासन को चार दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस समय के दौरान हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ बनती कार्रवाई न की गई और अस्पताल संबंधी लगाए आरोपों की जांच शुरू न हुई तो वे लाहौरी गेट थाने के बाहर धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करके उनके 21 वर्षीय बेटे को इंसाफ दिलाया जाए। हालांकि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में पुलिस प्रशासन और संबंधित निजी अस्पताल का पक्ष सामने आना बाकी है।

