लुधियानाः लुधियाना चंडीगढ़ रोड के सेक्टर-32 स्थित देव अस्पताल में सोमवार रात 11 बजे भारी हंगामा हुआ। अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने और पैसे बनाने के चक्कर में एक बच्ची की जान से खिलवाड़ करने के आरोप लगे हैं। गुस्साए परिजनों ने रात के समय अस्पताल के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की।
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी के बावजूद अस्पताल ने बच्ची को जबरन अपने पास भर्ती रखा, जिसके चलते सही समय पर इलाज न मिलने से उसने दम तोड़ दिया है। हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस को सूचना कर मामले को शांत करवाना पड़ा।
ताजपुर रोड निवासी और मृतका के पिता हरि लाल ने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी कल दोपहर करीब 1 बजे खेलते समय छत से नीचे गिर गई थी। गंभीर हालत में उसे तुरंत देव अस्पताल लाया गया।
पिता के मुताबिक जब हम बच्ची को लेकर आए तो वह बेहोश थी लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने जांच कर हमें तसल्ली दी कि बच्ची बिल्कुल ठीक है। दोपहर 1:30 बजे से शाम 7 बजे तक उसका कोई सही इलाज नहीं किया गया। अस्पताल में कोई भी न्यूरो डॉक्टर मौजूद नहीं था। उन्होंने पहले बच्ची को दाखिल कर लिया और फिर स्कैन करवाने के लिए किसी दूसरे अस्पताल भेज दिया। हरि लाल ने आरोप लगाया हमने डॉक्टरों से बार-बार कहा कि अगर बच्ची सीरियस है तो उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दें लेकिन वह कहते रहे कि चिंता की बात नहीं है सब ठीक है।
स्कैन के बाद बच्ची वापस देव अस्पताल आई लेकिन फिर भी प्रॉपर इलाज नहीं मिला। शाम को अचानक डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि हालत बहुत सीरियस है इसे कहीं और ले जाओ। जब हम उसे दीप अस्पताल (मॉडल टाउन) ले जाने के लिए एंबुलेंस में डाल रहे थे तो रास्ते में ही हमारी बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने पुलिस से अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उधर, डॉ. पवन ढींगरा ने बताया कि हमने पहले ही जवाब दे दिया था। उन्होंने कहा कि बच्ची दोपहर 1:30 बजे छत से गिरने के बाद हमारे पास लाई गई थी। उसकी हालत देखते हमने तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट दिया और दौरे न पड़ें इसके लिए इंजेक्शन लगाया। हमने उसे अपने यहां पक्के तौर पर दाखिल नहीं किया था। डॉ. ढींगरा ने बताया हमने बच्ची को तुरंत स्कैन के लिए भेज दिया था। शाम 5 बजे वह स्कैन करवाकर लौटी। हालांकि स्कैन की रिपोर्ट आने में देरी थी लेकिन फोन पर ही हमें पता चल गया था कि बच्ची के सिर में क्लॉट बन गए हैं और छठे हिस्सों में ब्रेन हैमरेज है। बच्ची तभी से बेहोश थी। शाम 5 बजे ही हमने परिजनों को स्पष्ट कह दिया था कि इसे किसी बड़े अस्पताल में ले जाएं। हमने बच्ची को ठीक है बताया था बिल्कुल बेबुनियाद है। अगर बच्ची ठीक होती तो हम उसका स्कैन क्यों करवाते। हमारे पास सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है, जिसमें सारी सच्चाई देखी जा सकती है।
रात करीब 11 बजे जब अस्पताल के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और धरने पर बैठे परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा तब स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत करवाया और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट्स खंगालने की तैयारी कर रही है।

