टेक्नोलॉजी: स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को बैटरी से जुड़ी काफी समस्याएं झेलनी पड़ती है। ऐसे में लोग अब स्मार्टफोन को ज्यादा महत्व देते हैं। इनमें उन्हें लंबा बैटरी बैकअप भी मिलता है। अब इसी को देखते हुए स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां अपने फोन्स में कई तरह के बदलाव कर रही हैं। अब कई नए प्रीमियम स्मार्टफोन्स में Silicon Carbon Battery का इस्तेमाल शुरु हो गया है। पहले ये टेक्नोलॉजी Honor, Xiaomi और Oppo जैसे कई चीनी ब्रांड्स तक सीमित ही थी परंतु अब Samsung ने भी अपने नए फोल्डेबल फोन्स में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया हुआ है।
Lithium-ion बैटरी होगी इस्तेमाल
करीबन पिछले दो दशकों से स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट में Lithium-ion बैटरी का इस्तेमाल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि ये काफी हल्की, बेहतरीन ताकत और हजारों बार चार्ज होने की क्षमता होती है परंतु इस टेक्नोलॉजी की भी एक सीमा होती है परंतु पुराने Lithium-Ion बैटरी में Graphite बेस्ड एनोड का इस्तेमाल होता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अब ग्रेफाइट अपनी मैक्सिमम ताकत के पास पहुंच गया है। इसमें ज्यादा सुधार की गुंजाइश नहीं है। इसी वजह से Silicon Carbon Technology की शुरुआत होती है।
आखिर क्या होती है Silicon Carbon Battery?
नई बैटरी टेक्नोलॉजी में ग्रेफाइट एनोड के साथ इसको थोड़ी मात्रा में Silicon Carbon Material में मिलाया जाता है। बैटरी का बाकी हिस्सा अभी भी Lithium-ion टेक्नोलॉजी पर ही बेस्ड रहता है। ये पूरी तरह से नई बैटरी नहीं होती बल्कि पूरी तरह से Lithium-ion बैटरी का ज्यादा एडवांस वर्जन कहते हैं।
मीडिया रिपोर्ट् के अनुसार, किसी भी रिजार्जेबल बैटरी के तीन पार्ट्स होते हैं। Anode, cathode और Electrolyte जब बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाती है तो एनर्जी एनोड में इकट्ठा होती है। जैसे-जैसे फोन का इस्तेमाल होता है। इलेक्ट्रॉन्स एनोज से कैथोड की ओर बढ़ते हैं इसी प्रोसेस से बिजली पैदा होती है। दोबारा चार्ज करने पर यही प्रोसेस रिवर्स में होता है। हर बार चार्ज और डिस्चार्ज होने के साथ ही बैटरी के अंदर होने वाली कैमिकल प्रोसेस धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है। यही कारण है कि कुछ सालों के बाद बैटरी की ताकत कम होने लग जाती है।
मिलेगा लंबा बैटरी बेकअप
सिलिकॉन की सबसे खास बात यह होती है कि ये ग्रेफाइट की मुकाबले कई गुना ज्यादा लिथियन आयन स्टोर कर सकता है। यही कारण है कि नॉर्मल साइज की बैटरी में पहले से कहीं ज्यादा एनर्जी भरी जा सकती है। इसका फायदा ये होता है कि फोन में ज्यादा Mah की बैटरी फिट हो पाएगी।
