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क्या सच में Israel को मान्यता देगा पाकिस्तान? Mark Rubio और Ishaq Dar ने दिया जवाब

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नई दिल्ली: अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार की अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई बैठक के दौरान एक सवाल ने सबका ध्यान खींच लिया। एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अचानक पूछा कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने के लिए तैयार है हालांकि डार और रुबियो ने उस समय कोई जवाब नहीं दिया है परंतु बाद में पाकिस्तान ने अपने रुख साफ करते हुए कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे पर उसकी कोई नीति में बदलाव नहीं आया है।

रिपोर्टर ने किया सवाल

शुक्रवार को वॉशिंगटन में हुई बैठक के दौरान द पाकिस्तान डेली के पत्रकार फैसल अली शाह ने जोर से सवाल किया है। क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देगा। यह सवाल ऐसे समय पूछा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई अरब और मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील कर चुके हैं हालांकि बैठक के दौरान न तो इशाक और न ही मार्को रुबियो ने इस सवाल का कोई जवाब दिया है।

 

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बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तान और गाजा के मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद तब तक इजरायल के प्रति अपनी नीति में किसी बदलाव पर विचार नहीं करेगा। जब तक फिलिस्तानी राज्य की स्थापना की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती है।

डार ने दोहराया कि पाकिस्तान का मानना है कि फिलिस्तीन समस्या का समाधाना दो राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर होना चाहिए। पाकिस्तान आज तक इजरायल को एक राष्ट्र के रुप में मान्यता नहीं देगा और दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तानी मुद्दे का समर्थन करता रहा है। इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने के लिए फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को जरुरी शर्त मानता है।

ट्रंप ने मुस्लिम देशों से क्या की अपील

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्न और जॉर्डन से सामूहिक रुप से अब्राहम समझौतों में शामिल होने और इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने का आग्रह किया है। यह पहल ईरान से जुड़े तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताई जा रही है। पाकिस्तान के इस सुझाव को उन्होंने ठुकरा दिया है। वहीं अन्य देशों की ओर से अभी तक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम एकॉर्ड की शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी की मध्यस्थता में हुई थी। इसका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इसके अंतर्गत संयुक्त अरब अमीरात बहरीन और मोरक्को ने इजरायल के साथ राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित किए। सूडान भी इस प्रक्रिया में शामिल हुआ था परंतु उसने अभी तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

हाल के महीनों में पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रुप में पेश किया है हालांकि ईरान से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की पहल में सबसे प्रमुख भूमिका सेना प्रमुख आसिम मुनीर निभाते हुए दिखाई दिए हैं। फिलहाल इजरायल को मान्यता देेने के सवाल पर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख अपरिवर्तित हैं और सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से पहले इस दिशा में किसी बदलाव की संभावना नहीं है।

 

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