चंडीगढ़: हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि उन्हें प्रदेश के शिक्षकों की क्षमता, समर्पण और कुशलता पर पूर्ण विश्वास है। शिक्षक ही बच्चों में ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास का संचार कर विकसित भारत-2047 के निर्माण की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने यह बात नई दिल्ली स्थित पूसा के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में 22 एवं 23 जुलाई, 2026 को आयोजित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कही। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के साथ स्कूली शिक्षा के विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
शिक्षा केवल बौद्धिक विकास नहीं, चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम
इस दौरान शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना या बौद्धिक विकास तक सीमित रहना नहीं है। वास्तविक शिक्षा वही है जो बच्चे के चरित्र, नैतिक संस्कारों, आत्मविश्वास और भावनात्मक समझ को मजबूती प्रदान करे। उन्होंने कहा कि हरियाणा की शिक्षा नीति का ध्येय हर बच्चे को उसकी विशिष्ट रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का समान अवसर देना है। राज्य में विद्यालयों को केवल पढ़ाई के केंद्र न बनाकर ऐसे जीवंत संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बच्चों के सपनों, प्रतिभा और व्यक्तित्व को सही और सकारात्मक दिशा मिल सके।
प्रारंभिक शिक्षा, कौशल और खेलों पर है विशेष बल
मंत्री महीपाल ढांडा ने हरियाणा सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बुनियादी साक्षरता एवं सीखने के स्तर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। विद्यार्थियों में कौशल विकास व स्वरोजगार की भावना विकसित करने के लिए व्यावहारिक पाठ्यक्रम लागू कर रही है। स्कूली स्तर से ही खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध करा रही है।
शिक्षक ही हैं ‘विकसित भारत-2047’ के वास्तविक शिल्पकार
शिक्षकों की भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत हैं। वे केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों में अनुशासन, संस्कार और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। हमारे शिक्षक प्रतिदिन कक्षाओं में देश का भविष्य गढ़ रहे हैं और यही ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण की वास्तविक नींव तैयार कर रहे हैं। उन्हें शिक्षकों की क्षमता, समर्पण और कुशलता पर पूर्ण विश्वास है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सभी गुरुजनों को शत-शत नमन किया।
आईटीआई, आईआईएमटी, आईआईएम और सीएसआईआर के सहयोग से सशक्त होगा शिक्षक प्रशिक्षण शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को निरंतर अपडेट करने की आवश्यकता पर बल देते हुए शिक्षा मंत्री ने एक दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत किया। शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी, आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए देश के शीर्ष संस्थानों—जैसे आईटीआई, आईआईएमटी, आईआईएम और सीएसआईआर का प्रत्यक्ष सहयोग लिया जाना चाहिए। इससे शिक्षकों को अत्याधुनिक शिक्षण विधियों और शोध- आधारित तकनीकों का लाभ मिल सकेगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया तथा राज्य परियोजना निदेशक श्री स्वप्निल रविंद्र पाटिल भी उपस्थित रहे।

