कानपुरः चमनगंज और बेकनगंज के दो शातिर अपराधियों ने ठगी का ऐसा मकड़जाल बुना कि 5600 करोड़ रुपये की बड़ी ठगी कर डाली। वहीं पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी का पर्दाफाश करते हुए दोनों आरोपियों को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। साइबर क्राइम टीम ने इस रैकेट के सरगना बेकनगंज के तलाक महल निवासी शाहवेज वारिस को हैदराबाद में ट्रेस किया। कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद उसे 48 घंटे के अंदर कानपुर लाया गया। उसकी निशानदेही पर ही दूसरा आरोपी चमनगंज निवासी सलमान भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ऑनलाइन गेमिंग, आईपीएल में सट्टा, शेयर मार्केट में निवेश का लालच और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। कम समय में पैसा कई गुना करने का झांसा देकर लोगों से उनके बैंक खातों में रकम मंगवाई जाती थी। ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने 76 फर्जी कंपनियां बना रखी थीं। इन फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक अकाउंट्स के जरिए पैसों को इधर-उधर घुमाया जाता था।
पुलिस के मुताबिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दोनों के खिलाफ कुल 86 शिकायतें दर्ज हैं। अकेले शाहवेज वारिस के 11 बैंक खातों में 170 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायतें हैं, जबकि सलमान के 2 खातों पर 16 करोड़ से ज्यादा के फ्रॉड की 32 शिकायतें मिली है। जांच में ये भी सामने आया कि शाहवेज के खिलाफ 18 अगस्त को केस दर्ज हुआ तो वह लुकआउट नोटिस जारी होने से पहले ही दुबई फरार हो गया था।
वह 21 अगस्त को लौटा और 24 अगस्त को फिर लुकआउट नोटिस जारी हुआ तो 25 अगस्त को दोबारा दुबई भाग गया। परसों जब वह हैदराबाद एयरपोर्ट पर उतरा तो वहीं से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले इस गैंग के दो अन्य सदस्य जाजमऊ का चांद सिद्दीकी और बेकनगंज का अमान खान 24 अगस्त को पकड़े जा चुके हैं। उनके खातों में भी 33.82 करोड़ और 559 करोड़ के लेनदेन मिले थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के दुबई कनेक्शन और अन्य साथियों की तलाश कर रही है।