नई दिल्लीः नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। वहीं आज दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत स्पेशल पावर दी गई है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह फैसला जंतर-मंतर पर चल रहे CJP छात्र आंदोलन को देखते हुए लिया गया है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इस दावे को गलत बताया है। पुलिस का कहना है कि यह हर तीन महीने में होने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। मौजूदा आदेश भी 7 जुलाई 2026 को ही जारी कर दिया गया था, यानी CJP आंदोलन के तेज होने से पहले ही। इसलिए इसका मौजूदा प्रदर्शन से कोई सीधा संबंध नहीं है।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, शहर के पुलिस आयुक्त को एनएसए की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लेने की शक्ति दी गई है। यह शक्ति 18 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगी। उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने की शक्ति को 18 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है। एक आधिकारिक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है।
कुछ दिन पहले ही हजारों लोगों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एनएसए के तहत हिरासत में लेने की शक्ति को हर तीन महीने में सामान्य रूप से बढ़ाया जाता है और इस मामले में कोई विशेष अनुरोध नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह शक्ति 1980 के दशक से दी जाती रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था।

