नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत पर अपनी राय रखी है। दीपांशु की जीत को उन्होंने Gen-Z की जीत बताया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर भी उन्होंने निशाना साधा है। सौरव दास ने कहा कि दीपांशु की जीत इसलिए खास है क्योंकि वो निर्दलीय प्रत्याशी होने के बाद भी रिकॉर्ज मतों के अंतर से जीते हैं। दीपांशु की जीत पर और भी कई नेताओं ने प्रतिक्रियाएं सामने आई है।
जेन-जी ने इतिहास रच दिया है
सौरव दास ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि – DUSU चुनाव की यह असली Gen-Z की कहानी को बताती है। यह बदलते दौर की निशानी भी है। सालों की कड़ी मेहनत के बाद एक निर्दलीय उम्मीदवार ने DUSU चुनाव में अब तक के सबसे ज्यादा वोट हासिल करके इतिहास रच दिया है। वहीं Gen-Z ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के लिए इतिहास रच दिया है। ऐसे में हो सकता है कि इसके बहुत गहरे मायने नहीं है परंतु सरकार में बैठे हुए लोगों को इसका बदलते दौर का संकेत समझना चाहिए।
30615 वोटों से जीते दीपांशु
बता दें कि डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद के लिए कुल 60,854 वोट पड़े थे। इसमें से दीपांशु शौकीन को 30615 वोट मिले। इशू मौर्या को 16910, वीर चतरथ को 4313 और अरण्य सिंह राठौड़ को 2,274 वोट मिले। ऐसे में डूसे के तीनों मुख्य पदों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार जीते। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिहं ने जीत दर्ज की है।
कांग्रेस को दी नसीहत
सौरव दास ने शनिवार को डूसु चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि डूसू चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि ज्यादा छात्र मौजूद शासन के खिलाफ हैं लेकिन बंटे हुए हैं। जीतने वालों को याद रखना चाहिए कि वो राजा या रानी नहीं है बहुमत ने उनको वोट भी नहीं दिया है।
वहीं सीजेपी की मुख्य प्रवक्ता ने कांग्रेस को भी नसीहत दी थी। उनका कहना है कि कांग्रेस और उसके संगठन को सीजेपी के पीछे पड़ने की जगह अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। प्रदर्शन में सुधार का काम कम से कम 12 साल से चल रहा है परंतु लोगों के सब्र का बांध भी अब टूट गया है।