ऊना,सुशील पंडित: पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी जमीन और जल संसाधनों के माध्यम से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ में हिमाचल और उन प्रभावित परिवारों की न्यायसंगत हिस्सेदारी सुनिश्चित होना जरूरी है, जिन्होंने विकास के लिए अपनी जमीन और घर तक छोड़ दिए।
सहोड़ ने कहा कि पोंग बांध विस्थापितों की करीब 55 वर्षों से लंबित जमीन, पुनर्वास और मुआवजे की समस्याएं आज भी गंभीर चिंता का विषय हैं। राजस्थान में विस्थापित हिमाचली परिवारों को आवंटित जमीन के जिन हिस्सों पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं, उन्हें अतिक्रमण मुक्त करवाकर वास्तविक हकदार परिवारों को उनकी जमीन का अधिकार दिलाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल के जल संसाधनों के उपयोग से प्रदेश को उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार, उचित पुनर्वास तथा लंबित जमीन और मुआवजा मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए स्पष्ट और स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए।
पंकज सहोड़ ने कहा कि BBMB में हिमाचल की सदस्यता के साथ प्रदेश के हितों की प्रभावी पैरवी और अधिकारों की मजबूती से रक्षा भी जरूरी है। हिमाचल देशहित में अपने संसाधनों का योगदान देता रहेगा, लेकिन विकास की कीमत उन परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती, जिन्होंने अपनी जमीन और घर देकर देश के विकास में योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब संसाधन देने वाले प्रदेश और प्रभावित लोगों को भी उसका न्यायपूर्ण लाभ मिले। हिमाचल के पानी, जमीन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ में प्रदेश की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करना समय की मांग है।
सहोड़ ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पोंग बांध विस्थापितों की 55 वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए, राजस्थान में आवंटित भूमि से जुड़े मामलों का प्रभावी समाधान किया जाए तथा हिमाचल के जल संसाधनों से प्रदेश के हित में उचित आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं स्थायी नीति बनाई जाए।