HomeGovernment NewsTele-ECG सेवा दिल के मरीजों को दे रही जीवनदान, 'गोल्डन ऑवर' में...

Tele-ECG सेवा दिल के मरीजों को दे रही जीवनदान, ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज से 131 गंभीर मरीजों की बचाई गई जान

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

चंडीगढ़- हरियाणा में टेली-ईसीजी सेवा दिल के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। यह योजना धरातल पर कितनी कारगर साबित हो रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआत के कुछ ही समय के भीतर अब तक राज्य भर में 2,688 मरीजों को यह सेवा प्रदान की जा चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस त्वरित जांच प्रणाली के माध्यम से मात्र सवा महीने में 131 बेहद गंभीर (क्रिटिकल) मामलों की समय रहते पहचान की गई, जिससे उन्हें तुरंत उचित इलाज मिल सका और उनकी जान बचाई जा सकी।

आपको बता दें कि इस दूरदर्शी स्वास्थ्य सेवा का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला से 29 मई 2026 को किया था , इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी उपस्थित थी। इस योजना के तहत राज्य के कुल 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को कवर किया गया है। इनमें 71 जिला नागरिक अस्पताल एवं उप-मंडल नागरिक अस्पताल, 121 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और 408 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) शामिल हैं। इस सेवा के चालू होने से अब ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उनके घर के नजदीक ही विशेषज्ञ हृदय रोग निदान की सुविधा मिलने लगी है, जिससे मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी और इलाज में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा। हरियाणा सरकार की इस पहल को राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को डिजिटल रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

‘गोल्डन ऑवर’ में मिलेगी संजीवनी, मौतों में आएगी एक-तिहाई कमी

चिकित्सा विज्ञान में दिल का दौरा पड़ने के बाद का पहला घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है, जिसमें तुरंत इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह टेली-ईसीजी सेवा इसी ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य हृदय रोगों (Cardiovascular Diseases) के कारण होने वाली अकाल मौतों में एक-तिहाई (1/3) तक की कमी लाना है। विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की रिपोर्टिंग और परामर्श समय पर मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।

मात्र 89 रुपये में ईसीजी के साथ 10 मिनट में मिल रही विशेषज्ञ रिपोर्ट

इस पूरी सेवा को बेहद किफायती और तीव्र बनाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रति ईसीजी की दर मात्र 89 रुपये निर्धारित की गई है। इस न्यूनतम राशि में न केवल ईसीजी का संचालन शामिल है, बल्कि टेली-रिपोर्टिंग तकनीक के माध्यम से मात्र 10 मिनट के भीतर विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) द्वारा ईसीजी की व्याख्या और रिपोर्ट प्रदान करना भी सुनिश्चित किया गया है। इस परियोजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स (RoP) 2026-27 के तहत मंजूरी दी जा चुकी है।

राज्य भर में सालाना लगभग 3,28,320 ईसीजी होंगे

प्रदेश में जिला नागरिक अस्पतालों , उप-मंडल अस्पतालों , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कुल संख्या 192 है जिनमें प्रति केंद्र औसतन 100 ईसीजी प्रति माह होने का अनुमान है, जिससे सालाना 2,30,400 ईसीजी होंगे। इस पर 2.05 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 408 है जहां पर प्रति केंद्र औसतन 20 ईसीजी प्रति माह होने की उम्मीद है, जिससे सालाना 97,920 ईसीजी होंगे। इस पर करीब 87.14 लाख रुपये का खर्च आएगा। कुल मिलाकर राज्य भर में सालाना लगभग 3,28,320 ईसीजी किए जाने का अनुमान है।

टेली-ईसीजी ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य क्रांति लाने का काम करेगी : आरती सिंह राव

हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस योजना की सफलता और भविष्य के रोडमैप पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि टेली-ईसीजी सेवा राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और आने वाले समय में यह तकनीक हरियाणा के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य क्रांति लाने का काम करेगी।

स्वास्थ्य मंत्री की संवेदनशीलता से उपजी योजना: एक दुखद घटना ने बदली प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था

इस क्रांतिकारी टेली-ईसीजी सेवा की शुरुआत के पीछे प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की गहरी मानवीय संवेदना और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही जुड़ी है। दरअसल, कुछ समय पहले स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में एक अत्यंत दुखद मामला आया था, जहाँ एक उप-मंडल स्वास्थ्य केंद्र (SDH) में दिल के दौरे से पीड़ित एक मरीज समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ बैठा। उस केंद्र पर ईसीजी की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण मरीज के दिल की वास्तविक स्थिति और हार्ट अटैक के अंदेशे का समय रहते पता नहीं चल सका। यदि वहां ईसीजी की व्यवस्था होती, तो रिपोर्ट के आधार पर मरीज को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर ही तुरंत किसी बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में रेफर कर उसकी जान बचाई जा सकती थी।

एक आम नागरिक की इस तरह ईसीजी न होने के कारण हुई अकाल मृत्यु की खबर ने स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव को अंदर तक झकझोर दिया और वे बेहद भावुक हो उठीं। उन्होंने इस त्रासदी को केवल एक घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी उप-मंडल स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक हर स्तर पर ईसीजी की अनिवार्य सुविधा शुरू की जाए। स्वास्थ्य मंत्री की इसी संवेदनशीलता, दूरदर्शी सोच और तत्परता का नतीजा है कि आज हरियाणा के 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टेली-ईसीजी सेवा धरातल पर उतर चुकी है, जो अब तक 131 से अधिक गंभीर मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो चुकी है।

- Advertisement - spot_img
- Advertisement - spot_img
- Advertisement - spot_img
- Advertisement -

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -