सेहत: बुखार शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण आता है हालांकि कुछ दिनों तक दवाई लेने के बाद और आराम करने से ठीक भी हो जाता है परंतु यदि आपका बुखार उतरने के बाद सीने में जकड़न, भारीपन, खांडी या सासं लेने में दिक्कत हो रही है तो ऐसे लक्षणों को सिर्फ बुखार के बाद होने वाली कमजोरी न समझें। सीने में जकड़न वैसे तो कई कारणों से हो सकती हैय़ वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद श्वसन तंत्र में सूजन और बलगम जमान होने के कारण सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। कुछ लोगों में इंफेक्शन के बाद लंबे समय तक खांसी या फिर छाती में भारीपन भी रह सकता है।
निमोनिया का भी हो सकता है लक्षण
फ्लू, वायरल इंफेक्शन या फिर श्वसन इंफेक्शन के दौरान भी फेंफड़ों और सांस की नलियों पर असर पड़ता है। कई बार संक्रमण कम होने के बाद भी सूजन कुछ समय तक बनी रहती है। इसके कारण भी छाती में जकड़न, सांस फूलना या खांसी की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में ब्रोंकाइटिस या फिर निमोनिया भी आपको हो सकता है। अगर आपको दोबारा बुखार आ रहा है, खांसी बढ़ रही है सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो डॉक्टर की सलाह जरुर लें।
ऐसे लक्षणों पर करें गौर
यदि सीने में जकड़न के साथ-साथ सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो रही है। इसके अलावा तेज सीने में दर्द, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना, बेहोशी, ज्यादा कमजोरी या खून वाली खांसी जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे बुखार उतरने के बाद फिर से तेज बुखार आना. सांस लेने में तकलीफ बढ़ना या सामान्य गतिविधियों के दौरान भी सांस फूल रही है तो इसको नजरअंदाज न करें।
बैलेंस्ड डाइट लें
ऐसे में आप शरीर को पूरा आराम दें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या फिर स्टेरॉयड जैसी दवाईयां न लें। बैलेंस्ड डाइट लें। एक्टिव लाइफस्टाइल फॉलो करें। तनाव भी आज के समय में लोगों की सबसे बड़ी समस्या बन रहा है ऐसे में फिजिक्ल एक्टिविटी जरुर करें। बुखार उतरने के बाद अगर कोई गंभीर संक्रमण दिख रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें।