अयोध्याः श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी की रकम में आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अकेले ही एक करोड़ से अधिक रकम पार कर दी। यह वह ब्योरा है जो पुलिस की चार्जशीट में दर्ज है। वह पहले 2024 में राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यकर्ता के रूप में गणना कार्य में लगा रहा। फिर 2025 में राम मंदिर ट्रस्ट और एसबीआई द्वारा गणना कक्ष की व्यवस्था के साथ गणना की धनराशि को बैक में जमा कराने के लिए अनुबंध के बाद बैंक द्वारा नियुक्त एजेंसी सैनिक सिक्योरिटी सर्विस के एजेंट के रूप में भी कार्यरत रहा।
इस मौके पर उसने कुल कितनी धनराशि पर हाथ मारा होगा, यह अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि श्रीराम मंदिर में कुल कितने करोड़ की चोरी हुई, यह लेखा जोखा न पुलिस के पास और न ट्रस्ट के पास है। प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी भी इसका ब्योरा नहीं जुटा सकी। एसआईटी यह भी सुनिश्चित नहीं कर पाई कि राम मंदिर में चोरी का सिलसिला कब से चल रहा है।
पुलिस की चार्जशीट के हवाले से अनुकल्प मिश्रा के पास से प्राप्त चल-अचल संपत्ति का ब्योरा एक करोड़ से कुछ कम है लेकिन उसने बीते दो सालों में कितनी धनराशि अपने हाथ खर्च कर दी, यह स्पष्ट नहीं है। अनुमान है कि उसने एक करोड़ से ऊपर की रकम पर हाथ साफ किया है। पुलिस द्वारा जुटाए साक्ष्यों में उसने कौशलपुरी कालोनी में अपने पिता रवीन्द्र मिश्रा के नाम एक मकान खरीदा था।
ये मकान उसने वंदना द्विवेदी से रजिस्ट्री कराई है, जिसकी कीमत करीब 55 लाख थी। आरोपी अनुकल्प ने यह रकम दो बार में चुकाई। पहले उसने साढ़े 29.5 लाख की धनराशि बैंक के माध्यम से द्विवेदी को अंतरित की। पुनः 25 लाख रुपए का भुगतान नकद किया। वंदना द्विवेदी ने शपथ पत्र के माध्यम से बयान दर्ज कराया है, जिसके मुताबिक 50 हजार की रकम अभी बकाया है।
श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपी अनुकल्प मिश्रा के रहन-सहन में अचानक बदलाव आया था। गांव में इसकी चर्चा थी लेकिन किसी को इसका अंदाजा नहीं था। बताते है कि अनुकल्प ने श्रीराम मंदिर से जुड़ने के बाद गांव में अपनी धाक जमाने के लिए खासा धन उड़ाता था और गांव के युवकों को प्रभावित करने की कोशिश करता था। बताते हैं कि उसने रामकथा का भव्य तरीके से गांव में आयोजन किया था और राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अलावा संतों व जनप्रतिनिधियों को भी अपने यहां आमंत्रित किया था। यही नहीं उसने गांव की महिलाओं के बीच साड़ियां भी बंटवाई थी।