नई दिल्ली: सूर्य और छाया पुत्र शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या पर हुआ था। इस दिन साल शनि जयंती 16 मई 2026 को है। शनि देव प्रसन्न हो तो अपने भक्तों का कुछ भी अनिष्ट नहीं होने देते हैं। इस दिन वट सावित्री व्रत भी किया जाता है। शनि जयंती के दिन शनि देव की सूर्यास्त के बाद पूजा करनी चाहिए। शनि जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त भी देखें। 13 साल बाद ऐसा संयोग आया है जब शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है। ये दिन और तिथि दोनों ही शनि देव को प्रिय है।
साल में 2 बार आती है शनि जयंती
उत्तर भारत में शनि जयंती अमावस्या को मनाई जाती है जो 16 मई को है। वहीं दक्षिण भारत में शनि जयंती वैशाख अमावस्या तिथि पर आती है। ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई 2026 का सुब 5.11 पर शुरु होगी और अगले दिन 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर इसका समापन होगा। शनि देव की पूजा के लिए रात 7.05 से रात 8.23 तक मुहूर्त है।
शनि जयंती पर करें उपाय
. इस मौके पर सबसे खास अनुष्ठानों में शनि तैलाभिषेकम और शनि शान्ति पूजा है। शनि जयंती के दिन सुबह स्नान ध्यान आदि करने के बाद पीपल की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ जल चढ़ाएं। 11 बार परिक्रम करें।
. शनि देव का नाम लेते हुए लोहा, जामुन, काला तिल, काले जूते तेल का दान करें।
इन लोगों का मिलता है शनि देव का आशीष
भगवान शनि निष्पक्ष न्याय में विश्वास करते हैं। अपने भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि देते हैं। जिन लोगों पर भगवान शनि का आशीर्वाद नहीं होता। उन्हें जीवन में कड़ा परिश्रम करने के बाद भी किसी प्रकार का कोई फल नहीं मिलता है और वो वर्षों तक बिना कुछ प्राप्त किए परिश्रम करते रहते हैं।
शनि क्यों होते हैं नाराज
. गरीब, लाचार और असहाय लोगों को प्रताड़ित करने वाले व्यक्ति पर भी शनि देव खुश नहीं होते हैं। जब उस व्यक्ति के जीवन में शनि की दशा आती है और तो फिर उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। शनि की मार उस पर पड़ती है।
. शराब, जुआ, चोरी, हत्या या बाकी तामसिक प्रवृत्ति में लिप्त लोगों को शनि देव का प्रकोप सहन करना पड़ता है।
