चंडीगढ़ / पठानकोट : पजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज शाहपुरकंडी के दो नव-निर्मित वाटर चैनलों का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इन वाटर चैनलों के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए सीधे पानी उपलब्ध होगा। इसके अलावा उन्होंने जिला पठानकोट में रंजीत सागर डैम, शाहपुरकंडी डैम बैराज परियोजना तथा माधोपुर हेडवर्क्स का दौरा कर पिछले वर्ष आई बाढ़ से हुए नुकसान के बाद कराए गए पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का जायजा लिया।
इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एस.ई. गुरपिंदर संधू, रंजीत सागर डैम के प्रमुख शेर सिंह तथा अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।
दौरे के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य में नहरी सिंचाई को मजबूत करने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने तथा भूजल संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर 2025 को शाहपुरकंडी डैम परियोजना के लोकार्पण के बाद शाहपुरकंडी चैनल के माध्यम से खेतों तक नहरी पानी की आपूर्ति शुरू होने से कंडी क्षेत्र के किसानों की दशकों पुरानी मांग पूरी हुई है।
उन्होंने बताया कि पहले लगभग 6,900 एकड़ भूमि को लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से पानी मिलता था, लेकिन पिछले 15 वर्षों से यह सुविधा बंद थी। पंजाब सरकार ने शाहपुरकंडी चैनल नंबर 3 और 4 का पुनर्निर्माण कर अतिरिक्त 6,000 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाया है। इसके परिणामस्वरूप अब लगभग 13,000 एकड़ भूमि को नहरी पानी उपलब्ध हो रहा है। लगभग 25 किलोमीटर लंबी इन चैनलों की कंक्रीट लाइनिंग और पुनर्निर्माण पर 38 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे जुगियाल, माधोपुर, रानीपुर सहित 15 गांवों की बंजर एवं पथरीली भूमि खेती योग्य बनी है और वर्षों बाद इन क्षेत्रों में नहरी पानी से खेती संभव हुई है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि जब सरकार ने कंडी क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचाने की घोषणा की थी, तब कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए थे, लेकिन आज यह वादा पूरी तरह साकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि खेतों तक नहरी पानी पहुंचाकर सरकार ने न केवल किसानों को बड़ी राहत दी है, बल्कि भूजल संरक्षण की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि भूजल स्तर लगातार गिरता रहता तो भविष्य में पंजाब को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ता।
श्री गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार ने हजारों किलोमीटर नहरों और खालों के निर्माण एवं मरम्मत के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया है। पहले पंजाब के हिस्से का केवल 26 प्रतिशत पानी ही सिंचाई में उपयोग होता था, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसे 86 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
माधोपुर हेडवर्क्स के संबंध में उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2025 को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान के बाद विभाग ने युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए दोनों ओर लगभग 500 मीटर लंबे सुरक्षा बांधों का निर्माण किया। अस्थायी रिंग बांध बनाकर 1 अक्टूबर 2025 से पंजाब और जम्मू-कश्मीर की नहरों में पुनः पूर्ण क्षमता के साथ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। उन्होंने बताया कि 54 गेटों का आधुनिकीकरण कर उन्हें विद्युत मोटरों से संचालित करने योग्य बनाया गया तथा क्षतिग्रस्त तीन गेटों का नए डिजाइन के अनुसार रिकॉर्ड समय में पुनर्निर्माण किया गया। इन सभी कार्यों पर लगभग 50 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 17 किलोमीटर लंबे वाटर कोर्सों की लाइनिंग पर 3.61 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिससे पानी की बचत हुई है तथा टेल एंड तक नहरी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
बरसात के मौसम की तैयारियों के संबंध में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान जिन-जिन स्थानों को कमजोर एवं संवेदनशील पाया गया था, वहां सुदृढ़ीकरण और मरम्मत के सभी कार्य पहले ही पूरे कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बाढ़ जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और लोगों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित कर दिए हैं, ताकि बरसात के मौसम में लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

