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हरियाणा में अनुसंधान तंत्र का होगा विस्तार, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

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चंडीगढ़- हरियाणा में नीति आधारित अनुसंधान तथा साक्ष्य-आधारित सुशासन को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एसजेएचआईएफएम) को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में मान्यता देने की कवायद हो रही है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक विकास के विजन तथा ‘विकसित हरियाणा-2047’ के लक्ष्य को बल देने के लिए एक सशक्त अनुसंधान तंत्र विकसित करना है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई एक बैठक में इस आशय के एक प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके तहत एसजेएचआईएफएम को पीएचडी शोध कार्यक्रम संचालित करने तथा नीति अनुसंधान, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में एक बहु-विषयक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इस पहल से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुसंधान को संस्थागत स्वरूप मिलेगा तथा सरकार में साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी।

उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह ने बताया कि एसजेएचआईएफएम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध किए जाने पर संस्थान विश्वविद्यालय अधिनियम, विश्वविद्यालय की विधियों तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप देश के अन्य प्रतिष्ठित शोध संस्थानों की तर्ज पर पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित कर सकेगा। उन्होंने बताया कि एसजेएचआईएफएम पहले से ही परिणाम-आधारित अनुसंधान, लोक नीति अध्ययन, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में कार्य कर रहा है और इस संबद्धता से उसकी शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

बैठक में एसजेएचआईएफएम में टीम लीड तथा स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर के स्वीकृत पदों के लिए पात्रता मानदंडों में संशोधन के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। संशोधित मानदंडों का उद्देश्य पीएच.डी. धारकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों तथा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं के विशेषज्ञों सहित अधिक योग्य एवं अनुभवी प्रतिभाओं को आकर्षित करना है। इससे प्रस्तावित पीएचडी. कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त मात्रा में पात्र शोध पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) भी उपलब्ध हो सकेंगे।

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