अमृतसरः मानवाधिकारों के रक्षक भाई जसवंत सिंह खलड़ा के जीवन और शहादत पर आधारित फिल्म सतलुज (पहले पंजाब 95) पर लगाई गई पाबंदी के विरोध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने ऐतराज जताया। एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में श्री हरिमंदर साहिब के बाहर प्लाज़ा में बड़ा इकट्ठ हुआ, जिसके बाद एसजीपीसी के कर्मचारियों ने डिप्टी कमिशनर कार्यालय तक रोष मार्च निकाला। इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल के नाम एक मांग पत्र भी सौंपा गया।
रोष मार्च के दौरान पत्रकारों से बातचीत में एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खलड़ा ने पंजाब में अनपहचान लाशों के संस्कारों की सच्चाई सामने लाकर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ऐसे महान शहीद के जीवन पर बनी फिल्म को रोकना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सच को दबाने की कोशिश भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेंसर बोर्ड द्वारा कई कट लगाए जाने और फिल्म का नाम बदलने के बावजूद इसे रिलीज़ न करने से सरकारों की मंशा पर सवाल उठते हैं।
एडवोकेट धामी ने मांग की कि फिल्म से तुरंत पाबंदी हटाकर इसे रिलीज़ करने की अनुमति दी जाए, ताकि नई पीढ़ी उस दौर की वास्तविकता और इतिहास से परिचित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड में ऐसजीपीसी का एक प्रतिनिधि शामिल किया जाना चाहिए, ताकि धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों से संबंधित फिल्मों के साथ न्याय हो सके।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने घोषणा की कि यदि फिल्म से पाबंदी नहीं हटाई जाती तो ऐसजीपीसी इसे गांव-गांव की संगत तक पहुंचाने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने संगत से भी 14 तारीख को सतलुज नदी के किनारे होने वाले अरदास समागम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

