मोहालीः आज के दौर में इंटरनेट मीडिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज बच्चे पढ़ाई में भी इसका काफी इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तो ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जमाना है। इस हालत में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह भी है कि बच्चों के लिए इसे खुला छोड़ना भी उचित नहीं है। बच्चे जरूर इंटरनेट का उपयोग करते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्हें इंटरनेट मीडिया के गलत प्रभावों से भी बचाना चाहिए। स्कूली बच्चों को इंटरनेट मीडिया से कैसे दूर रखना है और उन्हें कितनी छूट देनी चाहिए, इस पर सरकार काम कर रही है। सरकार ने इसकी स्टडी के लिए एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में शिक्षा विशेषज्ञ, शिक्षक, शिक्षा विभाग के अधिकारी और चाइल्ड वेल्फेयर विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
यह कमेटी यह जाँच कर रही है कि जिन राज्यों ने बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर पाबंदी लगाई है, उसका क्या परिणाम सामने आया है। जहां पाबंदी नहीं है, वहां बच्चों के परिणाम में कितना फर्क पड़ा है। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद सरकार तय करेगी कि स्कूली विद्यार्थियों के इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर कितनी और कैसी पाबंदी लगाई जाए। ये बातें शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दैनिक जागरूकता और पंजाबी जागरूकता द्वारा चंडीगढ़ में करवाई ‘जागरूकता विमर्श प्रोग्राम’ के दौरान कही। ब्लैकबोर्ड से स्टैंडर्ड बोर्ड तक परंपरागत शिक्षा ढांचे बनाम एआई मोड ऑफ एजुकेशन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर पहले ही यह नियम है कि 18 साल से कम उम्र के लोग अपना अकाउंट नहीं बना सकते।
इसके बावजूद बच्चों के अकाउंट कई सोशल साइट्स पर बन जाते हैं। इसका कहीं न कहीं बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अहम बात यह भी है कि बच्चों को स्कूल स्तर पर ही बदलती तकनीक के साथ अपडेट किया जाए। बैंस ने कहा कि शिक्षा विभाग की प्राथमिकता उन विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही इंटरप्रेन्ह्योर बनाने की है, जिसके लिए विद्यार्थियों के लिए बिजनेस ब्लास्टर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत हर बच्चे को एक-एक रूपए की सीड मनी का राशि दी जा रही है ताकि वे छोटे-छोटे बिजनेस आइडियाज के जरिए इंटरप्रेन्ह्योर बन सकें। अब तो कॉलेजों में पढ़ रहे हर छात्र पर इसका लागू किया गया है, जिसमें उन्हें क्रेडिट स्कोर भी उसी आधार पर मिलेगा। हर छात्र को स्टार्टअप आइडियाज देना और उस पर काम करना होगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के बेहतरीन आइडियाज को साकार करने के लिए प्रोफेशनल बैडियों का साथ भी दिया जा रहा है ताकि वे अपने स्टार्टअप आइडियाज को बड़े स्तर तक ला सकें।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश में पंजाब पहला सूबा है, जहां छठी से 12वीं कक्षा तक स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय को शुरू किया गया है। विद्यार्थी छठी कक्षा से ही एआई के साथ कोडिंग भी पढ़ेंगे और सीखेंगे। छठी का बच्चा जब तक 12वीं में पहुँचेगा, उसके भीतर कई बदलाव आ चुके होंगे। हम चाहते हैं कि वह साथ ही कोडिंग भी सीखें और 12वीं तक कोडिंग में माहिर बनकर स्कूल से बाहर निकले। स्कूलों में सिर्फ विद्यार्थी पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उसे बारीकी से समझाया भी जाएगा। न केवल इंटरैक्टिव सेशन, बल्कि प्रैक्टिकल वर्क पर भी जोर दिया गया है। इसी कारण पंजाब के हर स्कूल को वाईफाई भी दी गई है। आज सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के JEE और NEET की मुकाबले की परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग भी दी जा रही है। इससे पहले किसी ने इस बारे में सोचा भी नहीं था। लेकिन आज विद्यार्थियों को नामी कोचिंग संस्थानों के एक्सपर्ट कोचिंग दी जा रही है।
JEE मेन्स-1 में कोचिंग बेहतर नतीजे लाई है और NEET के नतीजों का इंतजार है। वहीं, JEE-2 के लिए भी छात्र कोचिंग ले रहे हैं। आने वाले समय में इससे न सिर्फ बेहतर नतीजे आएंगे, बल्कि रेकॉर्ड भी बनेंगे। हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब पहला ऐसा सूबा है, जहां शिक्षकों को देश-विदेश में टीचर ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है। हाल ही में फिनलैंड और अहमदाबाद में भी टीचर ट्रेनिंग के लिए शिक्षकों को भेजा गया है। वे कहते हैं कि हम चाहे किसी भी फील्ड में क्यों न हों, समय के साथ खुद को अपडेट रखना ज़रूरी है। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए टीचर ट्रेनिंग कराई गई है, जिसके अच्छे परिणाम भी देखे गए हैं। शिक्षकों की ट्रेनिंग शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है…। शिक्षा विभाग में कहीं न कहीं कमी जरूर है पर उनकी कोशिश है कि उस फर्क को कम कर सकें। हाल ही दैनिक जागरूकता और पंजाबी जागरूकता की खबरे के माध्यम से स्कूलों में आढ़तियों की कमियों का पता लगा, उन्हें समझाया और दूर भी करवाया गया। भविष्य में वह शिक्षा विभाग, स्कूलों और विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए अपना 100 प्रतिशत लगाएंगे।
