मोरिंडाः पंजाब में 2027 के चुनावों से पहले कांग्रेस में गुटबाजी को लेकर हलचल तेज हो गई। बताया जा रहा है कि चरणजीत सिंह चन्नी प्रधान ना बनाए जाने से नाराज चल रहे है। इसी के चलते उन्होंने पार्टी की ओर से की गई नई नियुक्तयों को लेकर आभार व्यक्त भी नहीं किया। पार्टी से नाराज चल रहे चन्नी ने मोर्चा खोल दिया है और अपने घर मोरिंडा में कांग्रेस नेताओं की इमरजेंसी मीटिंग बुला ली है। इस बैठक में 3 सांसदों, 12 विधायक और 40 के करीब पूर्व विधायक व 2022 में चुनाव हारे नेताओं को बुलाया गया।
चन्नी के आवास में होने वाली बैठक से पहले कांग्रेस नेताओं द्वारा अमरिंदर सिंह राजा वंडिग को पंजाब प्रधान बनाए जाने का विरोध जताया जा रहा है। दरअसल, चन्नी के आवास पर होने वाली बैठक में विधायक तृप्त राजिंदर बाजवा, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू व गुरकीरत कोटली के अलावा पूर्व विधायक गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, दविंदर सिंह घुबाया, इंद्रबीर सिंह बुलारिया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी, दर्शन बराड़, हरमिंदर सिंह गिल, मदनलाल जलालपुर, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लो, कमलजीत कड़वल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक चन्नी के घर पहुंच चुके है।
हालांकि अन्य नेताओं के आने का सिलसिला अभी जारी है। ऐसे में बैठक में चन्नी कोई बड़ा फैसला ले सकते है। वहीं मीटिंग में पहुंचे पूर्व विधायक दर्शन बराड़ ने दोटूक कहा कि अगर चन्नी को प्रधान न बनाया गया तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती। चरणजीत चन्नी का नाम चुनाव से पहले प्रदेश में कांग्रेस प्रधान पद के लिए फाइनल था, लेकिन अचानक इसे बदलते हुए लुधियाना के सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रखी गई। वहीं चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बना दिया गया। सूत्रों के अनुसार चन्नी के करीबी ने बताया कि प्रधान न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं।


