चंडीगढ़ः पंजाब विजिलेंस मुख्यालय से जुड़े 13 लाख रुपए के कथित रिश्वतखोरी मामले में बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, इस केस में फरार चल रहे विजिलेंस डीजीपी के रीडर इंस्पेक्टर ओपी राणा ने चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। जहां सीबीआई ने कोर्ट से इंस्पेक्टर ओपी राणा का 7 दिन की रिमांड हासिल किया है। राणा डीजीपी का रीडर था और विभाग ने उसे सस्पेंड कर दिया है। 11 मई को सीबीआई ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। इस केस में सीबीआई ने 3 बिचौलियों मलोट निवासी विकास गोयल, राघव गोयल और उनके ड्राइवर अंकित वाधवा को गिरफ्तार किया था, हालांकि राणा उस मौके पर सीबीआई को चकमा देकर फरार हो गया था।
आरोप है यह सब मिलकर मलोट में तैनात स्टेट टैक्स आफिसर अमित कुमार को किसी फर्जी केस में फंसा रहे थे और फिर उन्हें बचाने के नाम पर उनसे रिश्वत मांग रहे थे। अमित ने उनसे तंग आकर सीबीआई को शिकायत दे दी थी। बताया जा रहा है कि 2 दिन पहले ओपी राणा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली थी। सुनवाई के दौरान अदालत से सकारात्मक संकेत नहीं मिलने पर उन्होंने यह फैसला लिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया था।
यह मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ और मोहाली में ट्रैप ऑपरेशन चलाया था। जांच एजेंसी ने कथित बिचौलियों अंकित वधवा, राघव गोयल और विकास गोयल को शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपए नकद और एक महंगा मोबाइल फोन लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। सीबीआई की जांच में ओपी राणा का नाम सामने आने के बाद वह फरार चल रहे थे। मामले में अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए थे। अब सरेंडर के बाद सीबीआई उनसे पूछताछ कर मामले में आगे की जांच करेगी।
