चंडीगढ़: हरियाणा के सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों का ऋण कोई भी समाज या राष्ट्र कभी नहीं चुका सकता। सरकार केवल उनके और उनके परिवारों के कल्याण तथा हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर सकती हैं। हरियाणा के युवाओं में भारतीय सेनाओं में शामिल होने का गजब का जज्बा है, चाहे वह अन्य रैंक हो या अधिकारी स्तर। राव नरबीर सिंह ने बताया कि हाल ही में पंचकूला में राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय (आरआईएमसी), देहरादून के लिए भर्ती प्रक्रिया सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यह परीक्षा जनवरी 2027 में शुरू होने वाले सत्र के लिए आयोजित की गई थी।
राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1922 में आजादी से पहले हुई थी। स्थापना के बाद से ही यह संस्थान सैन्य नेतृत्व की नर्सरी के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बड़ी संख्या में विद्यार्थी आगे चलकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुंचे हैं।
सैनिकों के कल्याण के लिए बजट में 58.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी
राव नरबीर सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 में सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग का गठन किया था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वर्ष 2026-27 के बजट में सैनिकों के पुनर्वास और आजीविका संवर्धन के लिए हरियाणा सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण निगम स्थापित करने की घोषणा की है।
423 शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी सरकारी नौकरी
मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक शहीद सैनिकों के 423 आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही सशस्त्र पुलिस बलों और अग्नि वीरों को दी जाने वाली एकमुश्त वीरता पुरस्कार राशि में भी वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है।
सेना और केंद्रीय सशस्त्र बलों में हरियाणा के युवाओं की अहम भागीदारी
हरियाणा सदैव वीर सैनिकों की भूमि रहा है। प्रदेश के युवा थल सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ-साथ सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और असम राइफल्स जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।