कौशल आधारित शिक्षा, आसान ऋण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ठोस नीति बनाए
ऊना,सुशील पंडित: पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने राज्यपाल कविंद्र गुप्ता के उस विचार का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल प्रेरणादायक विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सरकार को धरातल पर प्रभावी योजनाएँ, व्यावहारिक प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने होंगे।
पंकज सहोड़ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा, मेहनत और उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी शिक्षा को बाजार और उद्योगों की जरूरतों से जोड़ा जाए तथा उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।
उन्होंने सरकार के समक्ष निम्नलिखित सुझाव रखे:
1. कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में डिग्री के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अकाउंटिंग और उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक कौशल विकसित किए जाएँ।
2. स्वरोजगार के लिए आसान ऋण: युवाओं को छोटे उद्योग, दुकान, सर्विस सेंटर और स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरल ऋण प्रक्रिया, सरकारी योजनाओं की जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जाए।
3. स्थानीय संसाधनों से रोजगार सृजन: हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और औषधीय पौधों के क्षेत्र में युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
4. स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा: स्थानीय कारीगरों, लघु उद्योगों और हिमाचली उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार और ऑनलाइन बिक्री की सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएँ, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
5. सौर ऊर्जा और नई तकनीक में प्रशिक्षण: युवाओं को सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों की मरम्मत, डिजिटल सेवाओं और अन्य उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए।
6. कॉलेजों में उद्यमिता केंद्र स्थापित हों: प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में उद्यमिता केंद्र स्थापित किए जाएँ, जहाँ युवाओं को बिजनेस प्लान बनाने, बाजार की मांग समझने, वित्तीय सहायता प्राप्त करने और अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिले।
7. प्रशिक्षण से व्यवसाय स्थापना तक सहायता: सरकार यह सुनिश्चित करे कि स्वरोजगार योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद युवाओं तक पहुँचे। युवाओं को केवल प्रशिक्षण देकर छोड़ने के बजाय उन्हें ऋण, बाजार, तकनीकी मार्गदर्शन और व्यवसाय स्थापित करने तक सहयोग दिया जाए।
पंकज सहोड़ ने कहा कि यदि युवाओं को सही कौशल, पूँजी, मार्गदर्शन और अवसर मिलें, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं, बल्कि अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे पलायन कम करने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में रोजगार की नीति का उद्देश्य केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भरता बढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं को निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए सक्षम बनाना भी होना चाहिए। इसके लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योगों, बैंकों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। पंकज सहोड़ ने कहा कि स्वदेशी से स्वावलंबन, कौशल से सशक्तिकरण और उद्यमिता से रोजगार सृजन ही आत्मनिर्भर हिमाचल तथा विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
