नई दिल्लीः दिल्ली के आश्रम स्थित किलोकरी गांव में शोर-शराबे और कथित हुड़दंग का विरोध करने पर 54 वर्षीय मणिपुरी संगीत शिक्षक और गिटारवादक चोंगथाम विक्रम सिंह की कथित तौर पर पिटाई कर दी गई। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती विक्रम सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने हत्या के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार 7 सितंबर को सनलाइट कॉलोनी थाने में विक्रम सिंह की कथित पिटाई को लेकर पीसीआर कॉल मिली थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सिंह ने अपने घर के सामने डिलीवरी कर्मचारियों और ढाबा कर्मियों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे शोर-शराबे और हुड़दंग का विरोध किया था। वह विरोध करने के लिए नीचे आए, जहां कथित तौर पर कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की।
विक्रम सिंह को उनके बेटे याइफाबा ने इलाज के लिए होली फैमिली अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि मामले में नाबालिगों समेत सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया है। मणिपुरी कार्यकर्ता और विद्वान बिनालक्ष्मी नेप्रम ने सोशल मीडिया पोस्ट में विक्रम सिंह की मौत की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह परिवार के साथ थीं और पोस्टमार्टम पूरा होने तक परिवार के साथ रहीं।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने घटना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों ने लंबे समय से तेज संगीत, सार्वजनिक हुड़दंग और नियमों की अनदेखी को सामान्य बनाया है, जिससे ‘दंड से मुक्ति की संस्कृति’ बनी।
मणिपुर के सांसद बिमोल अकोइजाम ने दोषियों को अनुकरणीय सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि चाहे व्यक्ति पूर्वोत्तर का हो या देश के किसी अन्य हिस्से का, हर किसी को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि डीसीपी ने उन्हें आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद युमनाम ने विक्रम सिंह के निधन पर शोक जताया।