कोलकाता के चर्चित RG कर अस्पताल रेप और मर्डर केस में करीब दो साल बाद बड़ा फैसला लिया गया है। पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने इस मामले की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार, 9 अगस्त 2026 को नई जांच के आदेश जारी किए। सरकार का कहना है कि इस मामले में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं और यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर घटना के दौरान क्या हुआ था और जांच में कहीं लापरवाही या गड़बड़ी तो नहीं हुई।
मुख्यमंत्री बोले- पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नई जांच का ऐलान करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने में नाकाम रही थी।
सरकार अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शुरुआती जांच के दौरान कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही सबूतों से किसी तरह की छेड़छाड़ हुई या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- सच सामने आना चाहिए
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत् मुखोपाध्याय ने कहा कि इस मामले में सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है और पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि RG कर अस्पताल की इस दर्दनाक घटना को दो साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि घटना के बाद क्या-क्या हुआ और जांच के दौरान सबूतों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ कैसे हुई। मंत्री के मुताबिक, अब संबंधित फाइलों को दोबारा खोला गया है। सरकार हर ऐसे सवाल की जांच करेगी, जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है।
सबूतों से छेड़छाड़ किसने की, होगी जांच
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि सबूतों के साथ कथित छेड़छाड़ के लिए कौन जिम्मेदार था। क्या किसी ने किसी के निर्देश पर ऐसा किया था या इसके पीछे कोई और वजह थी, इन सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे कानून का सामना करना पड़ेगा।
9 अगस्त 2024 को सामने आया था पूरा मामला
दरअसल, यह मामला 9 अगस्त 2024 का है। कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। महिला डॉक्टर चेस्ट मेडिसिन विभाग में पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी यानी PGT डॉक्टर थीं और उस रात उनकी ड्यूटी थी। ड्यूटी के दौरान वह आराम करने के लिए अस्पताल परिसर के सेमिनार हॉल में गई थीं।
बाद में सेमिनार हॉल में उनका शव बेहद गंभीर हालत में मिला। घटना की खबर सामने आते ही पूरे देश में आक्रोश फैल गया था और डॉक्टरों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
मुख्य आरोपी संजय रॉय को उम्रकैद
इस मामले में संजय रॉय को मुख्य आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई कोलकाता के सियालदह सेशन कोर्ट में हुई, जहां उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अब करीब दो साल बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने इस पूरे मामले से जुड़े अनसुलझे सवालों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है। नई जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि घटना के बाद जांच प्रक्रिया में कहीं कोई लापरवाही, गड़बड़ी या सबूतों से छेड़छाड़ तो नहीं हुई।