मनीष तिवारी को लेकर कांग्रेस पर जमकर साधे निशाने
जालंधर, ENS: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की मांग को लेकर दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त रूप से चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस के अध्यक्ष ओपी शाह की तरफ से की गई है। वहीं इस मामले को लेकर पूर्व मंत्री मनोरजंन कालिया का बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के कुछ लोगों ने भारत-पाक को सुलझाने की अच्छी पहल की है, लेकिन यह पहल इससे पहले 1972 में शिमला एग्रीमेंट द्वारा भी हुई थी। कालिया ने कहा कि पाकिस्तान उस दौरान बात पर सहमत नहीं हुआ था।
इसी के कारण पाकिस्तान को बंगलादेश गंवाना पड़ा था। इसके बाद वह अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लाहौर बस लेकर गए, लेकिन उसके बाद कारगील शुरू हो गई और कारगील में कब्जा कर लिया गया और उसे छुड़वाया गया। कालिया ने कहाकि पाकिस्तान पहले खुद सुधरे और उसके बाद बातचीत को लेकर बात करें। वहीं पहलगाम में हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि पाक की नापाक हरकतों के बाद ही भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया। उन्होंने कहा कि पाक द्वारा जब भी सुधार की बात की जाती है, तभी उनके द्वारा नापाक हरकतें शुरू की जाती है। वहीं शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा को लेकर कालिया ने कहा कि श्रद्धालुओं को लेकर भारी सिक्योरिटी तैनात कर दी गई है और केंद्र सरकार द्वारा मुस्तैदी से काम किया जा रहा है। यात्रा के दौरान उन्होंने मंगलमय कामना की।
उधर, कांग्रेस पार्टी द्वारा दी गई नियुक्तियों के दौरान नाराज चल रहे सासंद मनीष तिवारी को लेकर कालिया ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनीष तिवारी सासंद है और वह लुधियाना, श्री आनंदपुर साहिब के बाद अब चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव जीतकर सासंद बनें, लेकिन उनकी विडंबना यह है कि उन्हें सासंद नहीं समझा जाता। इसलिए पार्टी उनपर विश्वास नहीं जता रही। इसी के चलते आज मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके नाराजगी जताई है। कालिया ने कहा कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग प्रधानगी करते रहेंगे, विपक्ष के नेता के तौर पर प्रताप बाजवा अब भी काम करते रहेंगे। हालांकि सासंद चरणजीत सिंह चन्नी चाहते थे कि उन्हें प्रधानगी मिले, लेकिन पार्टी ने उन्हें कैपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानगी को लेकर कांग्रेस में विवाद रहेंगा और 2027 में भाजपा की सरकार पंजाब में आएगी।
पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारा साहिब को गिराने की निंदा करते हुए कहा कि उसका दोबारा से निर्माण करवाया जाना चाहिए, लेकिन गुरुद्वारा साहिब को गिराने की वह पाकिस्तान सरकार की कड़े शब्दों में निंदा करते है। बता दें कि भारत और पाकिस्तान में फिर से समझौता किए जाने को लेकर भारत की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर, राज्यसभा सांसद मनोज झा, रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत समेत कई एकेडमिशियन, पत्रकार, वकील और सोशल एक्टिविस्ट ने इस अपील का समर्थन किया है। वहीं पाकिस्तान की तरफ से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, वैज्ञानिक परवेज हूदभॉय और कई सोशल एक्टिविस्ट ने हस्ताक्षर किए हैं।

