रेलवे स्टेशन पर नहीं दिखा असर, बस स्टैंड पर लोग परेशान, सड़क पर किया सिमरन
जालंधर, ENS: कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बंदी सिंहों की रिहाई के समर्थन में दी गई पंजाब बंद की कॉल के दौरान जालंधर में बस स्टैंड पर यात्री परेशान दिखे। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर यात्री जाते दिखे। बस न मिलने पर ज्यादातर यात्रियों ने ट्रेन से सफर किया। पठानकोट जाने के लिए खन्ना से पहुंचे व्यक्ति न बताया कि बस स्टैंड पर आकर पता चला कि आज पंजाब बंद है। किसी तरह वह रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। यहां 11 बजे की टिकट ली है। वहीं जालंधर कौमी इंसाफ मोर्चा के लोगों ने गुरु नानक मिशन चौक पर धरना लगा रखा है। शहर में मकसूदां की तरफ जाम देखा गया वहीं रामा मंडी में पुलिस ने हाईवे पर बेरिकेड लगाकर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया है।
16 वर्षीय युवक अवचेत सिंह ने सरकार पर सिख समुदाय के साथ गंभीर भेदभाव के आरोप लगाए हैं। युवक ने बताया कि आज की बंद की कॉल का मुख्य कारण पिछले 31 वर्षों से जेलों में बंद बंदी सिंहों की रिहाई न होना और 15 अगस्त को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर किया गया पुलिस बल प्रयोग है। उसने आरोप लगाया कि अन्य मामलों के दोषियों को आसानी से बार-बार पैरोल मिल जाती है, जबकि अपनी मां की देखभाल के लिए पैरोल मांगने वाले भाई जगतार सिंह हवारा जैसे राजनीतिक बंदियों को केवल एक दिन की पैरोल देकर कौम का मजाक उड़ाया जाता है।
युवक ने ऐतिहासिक संदर्भों, 1984 के दौर, 1995 में सिख युवाओं के साथ हुए मानवाधिकार उल्लंघनों और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह व केपीएस गिल के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सिख समुदाय को भारतीय लोकतंत्र में इंसाफ नहीं मिल रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के संबंध में लिखे गए पत्रों को उसने केवल 2027 के चुनाव और वोटों की राजनीति से प्रेरित बताया। उसने चुनाव में वोट चोरी के भी गंभीर आरोप लगाए। बातचीत के अंत में युवक ने देश के राजनीतिक नेतृत्व और प्रधानमंत्री के प्रति तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सिख समुदाय अपने अधिकारों और पुरानी सीमाओं (जिसमें पाकिस्तान का पंजाब और हिमाचल भी शामिल था) को बहाल करने के लिए एक अलग पंजाब राज्य की मांग करता है।

