जालंधर, ENS: पंजाब विधानसभा 2027 के चुनावों से पहले एक बार फिर से कांग्रेस में गुटबाजी शुरू हो गई है। इस गुटबाजी ने 2022 की याद दिला दी। हालांकि 2022 में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू की गुटबाजी से कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ था। वहीं इस बार 2027 में सभी को एकजुट करने की कोशिश कर रही कांग्रेस हाईकमान एक बार फिर से विफल दिख रही है। दरअसल, पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक गुटबाजी खत्म करने, सोशल और रिजनल इक्वेशन को सेट करने के चक्कर में कांग्रेस हाईकमान पार्टी में बगावत को हवा दे बैठी। बताया जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस प्रधान की कुर्सी न मिलने से पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी बेहद नाराज हैं।
इसी वजह से कैंपेंनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने पर चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। चन्नी ही नहीं बल्कि उनके पूरे गुट ने हाईकमान के इस फैसले को नकार दिया। चरणजीत सिंह चन्नी ने आज (3 जुलाई) को अपने समर्थक सांसदों, विधायकों व हलका इंचार्जों की कैठक बुला दी है। बैठक में दो से तीन सांसद, 10 से 12 विधायकों और 40 के करीब हलका इंचार्जों के पहुंच सकते हैं। चन्नी अपने समर्थक नेताओं के साथ विचार विमर्श करके कोई बड़ा फैसला लेंगे। जिससे साफ है कि पंजाब कांग्रेस में फिर से कोई बड़ा धमाका होने वाला है।
सूत्रों के अनुसार प्रधान न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं। बता दें कि 2022 में नवजोत सिद्धू प्रधान थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रधान सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रधानगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है।
इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधानगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रधान रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए।

