चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेशानुसार प्रोपर्टी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पेपरलेस करने के सरकार के फैसले का बड़ा असर नजर आ रहा है। प्रोपर्टी रजिस्ट्रेशन के डिजिटल होने, 140 प्रकार की डीड के लिए एसओपी तैयार करने तथा बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से संपत्ति पंजीकरण के क्षेत्र में नई व्यवस्था कायम हुई है। इन व्यापक सुधारों के चलते राज्य का स्टांप ड्यूटी राजस्व हर वर्ष लगभग 9 से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
हरियाणा की राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ये सुधार इस बात का प्रमाण हैं कि अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत राजस्व वृद्धि के साथ जोड़ा जा सकता है। डॉ. सुमिता मिश्रा आज चंडीगढ़ में हरियाणा के अपने कर राजस्व को मजबूत करने व विकसित हरियाणा 2047 के लिए कर संरचना और विश्लेषण-संचालित कर प्रशासन में सुधार विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने हरियाणा में संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था में किए गए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य उस पुरानी व्यवस्था से आगे निकल चुका है, जिसमें नागरिकों को बार-बार तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते थे और स्टांप वेंडरों, डीड राइटरों, वकीलों तथा अन्य बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, कि हमने इन सभी प्रक्रियाओं को सरल बना दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकारों के सामने वास्तविक चुनौती यह है कि वे अपनी व्यवस्थाओं को आम नागरिक की नजर से देखें। डॉ. मिश्रा ने कहा कि सरकारों के लिए नागरिक की तरह सोच पाना एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की संपत्ति पंजीकरण व्यवस्था में किए गए सुधार प्रशासनिक सुधारों के लिए आगे का रास्ता दिखाते हैं। बिचौलियों को हटाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करनाकृइन सभी सुधारों को इस तरह लागू किया गया है कि सरकारी राजस्व को भी सुरक्षित रखा जा सके और उसमें निरंतर वृद्धि हो।