नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच में व्यापार को लेकर पिछले डेढ़ सालों में काफी हालात बदल गए हैं। फरवरी 2025 से अमेरिका ने भारत पर 10% टैरिफ लगाना शुरु किया था। वहीं अब अमेरिका की संसद में ऐसे बिल को मंजूरी मिल गई है जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रुस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगा पाएंगे। सूत्रों की मानें तो भारत की इस दायरे में आ सकता है।
फरवरी 2025 में ट्रंप ने कह दिया था कि अमेरिका अब दूसरे देशों के अमेरिकी सामान पर लगाए हुए टैरिफ के हिसाब से ही अपना टैरिफ तय करेगा। वहीं इसी दौरान भारत और अमेरिका ने सीमित व्यापार समझौते पर भी काम करना शुरु कर दिया है। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा है।
26% टैरिफ बढ़ाने का किया था ऐलान
अप्रैल में अमेरिका ने भारतीय सामान पर भी 26% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। वहीं इसके बाद उन्होंने इसके लागू होने पर ही 90 दिनों की रोक लगा दी थी। इस दौरान भारतीय सामान पर भी 10% टैरिफ लगा रहा।
जुलाई 2025 में अमेरिका ने भारत के सामान पर 25% टैरिफ लगाया था। इसके बाद टैरिफ 25% और बढ़ा दिया गया था। ऐसे में कुल टैरिफ भारत पर 50% तक पहुंच गया। भारत का रुस से तेल खरीदने को अमेरिका की नाराजगी का बड़ा कारण बताया है। भारत ने इसका विरोध भी किया था। भारत का कहना था कि उसको अपने राष्ट्रीय हित और 1.4 अरब लोगों की एनर्जी जरुरतों को देखते हुए फैसले लेने का अधिकार बताया है।
दोनों देशों में शुरु हुआ था व्यापार समझौता
फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच में तनाव कम हुआ था। ऐसे में अमेरिका ने भारत के सामान पर टैरिफ कम करके 18% कर दिया था। इसका कारण रुस से तेल खरीदने था। वहीं दोनों देशों ने इससे जुड़ा एक व्यापार समझौता भी जारी किया था।
वही सितंबर में अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने रुस और ईरान पर दबाव बढ़ाने वाले बिल को भी मंजूरी दे दी है। इस बिल में ट्रंप को रुस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी 100% तक टैरिफ लगाने के अधिकार का प्रावधान है। इसका मकसद रुस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है।
भारत के लिए यह मुद्दा बड़ा बन चुका है क्योंकि वो रुस से तेल खरीदता है। वहीं भारत ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ऐसे कदम से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा सवाल यहां पर यह है कि इस प्रावधान को कैसे लागू किया जाएगा। वहीं भारत-अमेरिका के व्यापार पर इससे कितना असर पड़ेगा।