डेरे में नवनिर्मित लंगर शेड का किया शुभारंभ
ऊना/सुशील पंडित: डेरा बाबा रूद्रानंद बसाल में आने वाले श्रद्धालुओं को लंगर की बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को डेरा बाबा रूद्रानंद परिसर में नवनिर्मित लंगर शेड का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों का उत्थान करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू संस्कृति के संरक्षण हेतू मंदिरों के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि डेरा बाबा रूद्रानंद स्थल महाराज सुग्रीवानंद की वर्षों की तपस्या, लगन व परिश्राम का ही प्रतिफल है कि इस समागम से इतने लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सुग्रीवानंद महाराज जी एक ऐसा व्यक्तित्व है जो चारों वेदों, 18 पुराणों और छः दर्शनों के ज्ञाता हैं। उन्होंने कहा कि साधू महात्मा तो काफी मिल जाएंगे लेकिन ऐसे परम ज्ञानी व्यक्ति कम ही मिलते हैं। महाराज जी ने अपना पूरा जीवन इस डेरे के लिए सर्म्पण कर लाखों लोगों को इस धार्मिक स्थल से जोड़ा है। उन्होंने महाराज जी ने हरिद्वार, दिल्ली व अमलैहड़ बडे़ आश्रमों में भी पूरी लगन व मेहनत के साथ श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई हैं। उन्होंने सुग्रीवानंद महाराज जी की दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि लोगों की जितनी आस्था डेरे और धूने में है उतनी ही आस्था महाराज जी में है। उन्होंने युवाओं से भी आहवान किया कि वे भी धार्मिक आस्थाओं से जुडे़।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ईश्वर की भक्ति में महाराज जी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराज की उन पर पूरा आशीर्वाद रहता है। जब भी कभी उन्हें कोई समस्या आती है तो महाराज जी का आशीर्वाद लेने बाबा डेरा पहुंच जाते हैं। उन्होंने लोगों से भी आहवान किया कि वे अपनी पूंजी का कुछ हिस्सा मानवता की सेवा और धार्मिक कार्यों में अवश्य लगाएं।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं को सुगमता से माता श्री चिंतपूर्णी के दर्शन हो सके इसके लिए सुगम दर्शन प्रणाली की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि इसी प्रणाली के तहत 100 के भीतर माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर को लगभग एक करोड़ रूपये की आय हुई है। इसके अतिरिक्त माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 76 करोड़ रूपये की राशि रोपवे निर्माण के लिए स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि डेरा बाबा रूद्रानंद में श्रद्धालुओं के लिए भी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डेरा बाबा रूद्रानंद में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक किलोमीटर सड़क, नाला और डेरे में भव्य द्वार बनाया जाएगा। इस दौरान डेरा बाबा रूद्रानंद की ओर से खाद्य सामग्री का एक ट्रक आपदा राहत सहायतार्थ हेतू जिला मंडी को रवाना किया।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री की धर्म पत्नि सिम्मी अग्निहोत्री और पुत्री आस्था अग्निहोत्री उपस्थित रही और महाराज जी का आशीर्वाद लिया।
इस मौके डेरा बाबा रूद्रानंद से सुग्रीवानंद जी महाराज, आचार्य हेमानंद जी महाराज,भागवत व्यास रमाकांत शास्त्री, सतपाल शास्त्री, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रणजीत सिंह राणा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अशोक ठाकुर, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विनोद विट्टू के अतिरिक्त अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
यज्ञ शुभारंभ के लिए सर्वश्रेष्ठ है अरणीमंथन से उत्पन्न अग्नि: आचार्य हेमानंद जी महाराज
डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम में चल रहे पंच भीष्म महोत्सव में पहुंचे उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम नारी में चल रहे पंच भीष्म पर्व के उपलक्ष में वेदांताचार्य 1008 बाबा सुग्रीवानंद जी महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुए कार्यक्रम जोकि 27 नवम्बर तक मनाया जाएगा। बीते कल से शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा 26 नवंबर तक आचार्य रमाकांत के श्री मुख से सुनाई जा रही है। इस दौरान शुरू हुए एक करोड़ गायत्री कोटी महायज्ञ का अनुष्ठान किया जा रहा है हवन यज्ञ से पहले वेद मंत्रों से अग्नि प्रज्वलित की गई। महाराज सुग्रीवानंद जी व उनके परम शिष्य आचार्य हेमानंद जी के सानिध्य में चल रहे पंच भीष्म महोत्सव पर उपमुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश मुकेश अग्निहोत्री ने विशेष रूप से अरणीमंथन के मौके पर भाग लिया और अरणी मंथन कर अग्नि प्रज्वलित की। उपमुख्यमंत्री ने लंगर हाल का शुभारंभ भी किया।
विदित हो कि डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम में 150 साल से अधिक समय से यज्ञ किया जा रहा है साल 1850 में पहली बार यहां यज्ञ का आयोजन किया गया। 1864 में लंगर की शुरुआत की गई जो की निरंतर जारी है। मान्यता है कि इस आश्रम में पांच महात्माओं ने समाधि ली थी उसी स्थान पर आज भी पांच पीपल हैं भक्तों का विश्वास है कि इन पीपल के वृक्षों की परिक्रमा करने से सांप के डसें हुए व्यक्ति का इलाज संभव है।
अचार्य हेमानंद जी ने बताया कि यज्ञ शुभारंभ के लिए सर्वश्रेष्ठ है अरणी मंथन से उत्पन्न अग्नि, यज्ञ के द्वारा ही ईश्वर की उपासना करते हैं यज्ञ में आहुति के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है अग्नि व्यापक है लेकिन यज्ञ के निमित्त उसे प्रकट करने के लिए भारत में वैदिक पद्धति है जिसे अरणीमंथन कहते हैं आधुनिक युग में माचिस से लेकर गैस लाइटर होने के बाद भी यज्ञ शुभारंभ के लिए शास्त्रों में बताई गई सदियों पुरानी पद्धति से ही अग्नि को उत्पन्न किया जाता है। डेरा बाबा रूद्रानंद आश्रम में आज अरणी मंथन पद्धति से अग्नि उत्पन्न कर यज्ञ शुरू किया गया।
कैसे होती है यज्ञ के लिए अग्नि उत्पन्न

आचार्य हेमानंद जी ने बताया शमी के वृक्ष में जब पीपल उग आता है, शमी को शास्त्रों में अग्नि का स्वरूप कहा गया है जबकि पीपल को भगवान का स्वरूप माना गया है यज्ञ के द्वारा भगवान की स्तुति करते हैं, अग्नि का स्वरूप है शमी और नारायण का स्वरूप पीपल, इसी वृक्ष से अरणी मंथन काष्ट बनता है उसमें अग्नि विद्यमान होती है ऐसा हमारे शास्त्रों में उल्लेख है। इसके बाद अग्नि मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि को प्रकट करते हैं।
आचार्य ने बताया कि शमी की लकड़ी का एक तख्त होता है जिसमें एक छेद रहता है इस छेद पर लकड़ी की छड़ी को मधानी की तरह तेजी से चलाया जाता है इससे तख्ते में चिंगारी उत्पन्न होने लगती है जिससे नीचे रखी घास व रूई में लेकर उसे हवा देकर बढ़ाया जाता है इसी अग्नि का यज्ञ में उपयोग किया जाता है। अरणी में छड़ी के टुकड़े को उतरा और तख्ते को अधरा कहते हैं।
