नई दिल्लीः दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तरफ से की कार्रवाई और हिरासत के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है।
मामले में सुनवाई के शुरुआत के साथ ही बेंच ने स्पष्ट किया कि मामलों की गंभीरता को देखते कोर्ट में मौजूद सभी वकीलों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। जब वकीलों ने इस विशेष सुनवाई के लिए कोर्ट का धन्यवाद किया, तो जस्टिस बागची ने कहा कि धन्यवाद देने की कोई जरूरत नहीं है, हम हमेशा देश की सेवा में हैं।
मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत और धारा 163 (निषेधाज्ञा) लगाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पुलिस लोगों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में ले रही है। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं के निलंबन पर भी सवाल उठाए और ‘अनुराधा भसीन मामले’ के पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।
वहीं वरिष्ठ वकील शदान फरासत ने प्रदर्शनकारियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कैसे प्रदर्शनकारियों को घसीटकर बसों में डाला जा रहा है और फिर उन्हें बसों से बाहर फेंका जा रहा है। वहीं कल से दिल्ली में मेट्रो और इंटरनेट सेवा बंद है।
शदान ने आगे तर्क दिया कि निहत्थे बच्चों और छात्रों को पीटा गया। बता दें कि मीडिया में ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं जिनमें शदान फरासत खुद पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाते हुए नजर आ रहे हैं। उधर, वरिष्ठ वकील एन. हरिशरण ने कोर्ट में कहा कि मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि अब नागरिकों से शहर में आने-जाने का अधिकार भी छीन लिया गया है।
