चंडीगढ़ः पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सख्त रवैया अपनाया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वो पंजाब पुलिस के लिए जल्द से जल्द नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त करें। ये आदेश अधिवक्ता निखिल थमम्न की और से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। वहीं सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है और सरकार ने वहां अपना अनुपालन शपथपत्र भी दाखिल कर दिया है। इस शपथपत्र की कॉपी हाईकोर्ट में भी पेश की गई।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 8 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से नियुक्ति को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा कि डीजीपी का पद राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पुलिस प्रमुख सीधे तौर पर पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ा होता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद को अंतरिम या अस्थायी व्यवस्था के जरिए लंबे समय तक नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह बताने को कहा है कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। पिटीशनकर्ता निखिल थम्मन की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि पंजाब एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य है।
ऐसे में राज्य की पुलिस का नियमित प्रमुख होना जरूरी है। पिटीशन में कहा गया कि मौजूदा डीजीपी गौरव यादव को अंतरिम व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद अभी तक नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हुई है। पिटीशनकर्ता के अनुसार, UPSC ने जुलाई में पंजाब के नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए 3 अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजा था। इसमें शरद सत्य चौहान, हरप्रीत सिंह सिद्धू और गौरव यादव के नाम शामिल हैं। इसकी पुष्टि जून-जुलाई 2026 की रिपोर्टों में भी हुई थी। गौरव यादव जुलाई 2022 से पंजाब के कार्यवाहक/ऑफिशिएटिंग डीजीपी के तौर पर काम कर रहे हैं। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, वह साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से इस पद पर कार्यवाहक व्यवस्था में थे।