जालंधर, ENS: तहसील कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार दो दिनों से लोग सुबह से शाम तक लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री का काम नहीं हो पा रहा है। हर दिन कार्यालय में कोई न कोई नया बहाना बनाकर लोगों को वापस भेज दिया जाता है। कभी सर्वर ठप्प होने की बात कही जाती है, तो कभी मौके पर जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं रहते। इस वजह से आम जनता का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
जालंधर तहसील कार्यालय में अपनी जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे स्थानीय निवासी आरके सूरी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि मिठापुर रोड पर स्थित अपने रिश्तेदार की जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए वे पिछले दो दिनों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं। कल भी लोग सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक केवल अपनी बारी के इंतजार में बैठे रहे, लेकिन अंत में उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब और समय पर पड़ रहा है। सूरी के अनुसार, एक बार की अपॉइंटमेंट लेने के लिए लगभग ₹1,000 का खर्च आता है। सर्वर और अधिकारियों की अनिश्चितता के कारण लोगों को बार-बार अपॉइंटमेंट लेनी पड़ रही है, जिससे हर दिन हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। दो दिनों से लगातार पैसे खर्च करने के बाद भी काम न होने से आवेदकों में भारी रोष है। कार्यालय के अंदर से मिलने वाले बहानों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कल दिनभर यह कहकर काम टाल दिया गया कि सर्वर डाउन है और सिस्टम काम नहीं कर रहा है।
वहीं, जब आज लोग दोबारा अपनी अपॉइंटमेंट लेकर पहुंचे, तो बहाना बदल गया। आज बताया गया कि तहसीलदार साहब ही दफ्तर में मौजूद नहीं हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच दूर-दूर से आए लोग, जिनमें दिहाड़ी मजदूर और आम नागरिक शामिल हैं, घंटों लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि दो दिनों से उनकी दिहाड़ी और जरूरी काम पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। तहसील कार्यालय में व्याप्त इस अव्यवस्था से जनता बेहद निराश है और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।