अमृतसरः लुधियाना में पुलिस एनकाउंटर में अमृतसर के युवक कर्णजोत सिंह उर्फ करण की मौत के बाद उसके परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए है। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद से परिवार गम में डूबा हुआ है। मृतक की मां जसवंत कौर ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगाया है और पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
जसवंत कौर ने कहा कि अगर उनके बेटे ने कोई गलती की थी या वह किसी अपराध में शामिल था, तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती थी और उससे पूछताछ कर सकती थी। सवाल उठाते उन्होंने पूछा कि अगर कर्णजोत पुलिस से भाग रहा था, तो उसे पकड़ने के लिए पैर में गोली क्यों नहीं मारी गई? परिवार को इस बात का जवाब चाहिए कि पुलिस ने सीधे उसकी जान क्यों ले ली।
मृतक की मां ने बताया कि कर्णजोत अपने पिता के साथ कारपेंटर का काम करता था। वह लकड़ी ठेकेदारों के साथ अलग-अलग कंस्ट्रक्शन साइटों पर जाता था और काम के सिलसिले में अक्सर एक बार में एक हफ्ते या 10 दिन तक घर से बाहर रहता था। परिवार ने बताया कि घटना से ठीक दो दिन पहले कर्णजोत काम के लिए घर से निकला था। जसवंत कौर ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बात की थी। सुबह करीब 11 बजे करण ने कहा था कि वह ठीक है और जल्द ही घर लौट आएगा। हालांकि उसी दिन शाम करीब 5 बजे उनकी बेटी ने बाहर से फोन करके परिवार को बताया कि पुलिस ने कर्णजोत को गोली मार दी है। यह खबर सुनकर परिवार टूट गया।
कर्णजोत ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और IELTS की परीक्षा भी दी थी। परिवार का कहना है कि उसके दोस्तों का दायरा आम था, लेकिन हाल ही में वह एक नए युवक के संपर्क में आया था। परिवार इस व्यक्ति को नहीं जानता और उन्हें शक है कि उसके साथ जुड़ने के बाद करण किसी विवाद या आपराधिक मामले में फंस गया होगा। परिवार ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है, घर का खर्च पिता और बेटे की दिहाड़ी मजदूरी और लकड़ी के काम से चलता था। उनके पास न तो कोई बड़ी बचत है और न ही कोई अन्य आर्थिक सहारा। मृतक की मां ने सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर पुलिस की कार्रवाई सही थी तो पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं, अगर कार्रवाई में कोई गड़बड़ी हुई थी, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।