नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच में विवाद फिर से बढ़ चुका है। पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी अब भारत के खिलाफ अपनी बात रख दी है। भारत के इस फैसले को उन्होंने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता अदालत को भारत के फैसलों पर आदेश देने का कोई हक नहीं है।
India’s rogue actions can never withstand the scrutiny of international law, or any court. The Indus Waters Treaty can neither be arbitrarily annulled, nor repealed, nor put aside. Any normal state would find this embarrassing and perhaps consider course correction. https://t.co/b2mkWOuek9
— Hina Rabbani Khar (@HinaRKhar) August 31, 2026
विदेश मंत्री ने की भारत की आलोचना
हिना रब्बारी खार ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की ओर से जारी किए गए मीडिया रिलीज को अपने सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है। विदेश मंत्री ने एक्स प्लेटफॉर्म पर प्रेस रिलीज करते हुए भारत की आलोचना कर दी है। उनका कहना है कि भारत के ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून या फिर किसी भी अदालत की जांच में नहीं टिकेंगे। हिना का यह भी कहना है कि सिंधु जल संधि को एक देश के बोलने पर आखिर कैसे रद्द और खत्म किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारत को अपनी नीति के बारे में एक बार फिर सोच लेना चाहिए।
सिंधू जल संधि अभी भी लागू है
कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले पर कानूनी आधार पर विचार भी किया है। अदालत का यह कहना है कि उसके सामने मौजूद आधारों में से कोई भी संधि को निलंबित या खत्म करने के लिए नहीं ठहरता है। अदालत के अनुसार, सिंधु जल संधि अभी भी चल रही है और भारत को इसके अंतर्गत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना पड़ेगा।
पहलगाम अटैक के बाद स्थगित हुई थी सिंधु जल संधि
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े कदम उठाए थे। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला कर लिया था। पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को चुनौती देते हुए हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिटेशन का रुख भी किया है। पाकिस्तान का यह कहना है कि संधि को भारत अपनी तरफ से एकतरफा तरीके से खत्म या फिर निलंबित नहीं कर सकता है।