अमृतसरः सिख कैदियों की रिहाई और जेलों में सिखों के मानवाधिकारों को लेकर लगातार राजनीति हो रही है। इस बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा है जो सिख कैदियों की रिहाई के लिए आवाज़ उठा रहे हैं कि वे पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा की कोशिशों से मार्ग-दर्शन लें।
गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अगर कोई सिखों की भावनाओं के प्रति सहानुभूति रखता है, तो उसके लिए सम्मान की भावना होती है, लेकिन आज सिख कैदियों के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती रहीं, मुख्यमंत्री बदलते रहे, लेकिन सिखों के कई मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।
भाई ग्रेवाल ने भाई जगतार सिंह हवारा की मां की बीमारी का जिक्र करते कहा कि मानवीय और सहानुभूति के आधार पर उन्हें अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दी जानी चाहिए। इस मामले में अपील भी की है और यह मामला अदालतों और सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने भाई बलवंत सिंह राजोआना की फांसी रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा की कोशिशों का जिक्र करते कहा कि 2012 में फांसी की तारीख घोषित होने के बाद प्रकाश सिंह बादल खुद दिल्ली गए, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिले। उन्होंने कहा कि इसके बाद फांसी रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
भाई ग्रेवाल ने कहा कि जो लोग आज जेल में बंद सिखों की रिहाई और पैरोल की बात कर रहे हैं, उन्हें पिछली सरकारों के फैसलों और कामों पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में सिर्फ तथ्य और तारीखें ही असलियत सामने लाते हैं। अगर कोई व्यक्ति सिख समुदाय और जेल में बंद सिखों के लिए ईमानदारी से आवाज उठाता है, तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए।