नई दिल्लीः भारतीय वायुसेना (IAF) ने फाइटर पायलटों की ट्रेनिंग को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वायुसेना ने अगली पीढ़ी के 150 जेट ट्रेनर विमानों की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये विमान मौजूदा हॉक Mk-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर्स की जगह लेंगे।
IAF ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया है। ये किसी बड़े रक्षा सौदे की प्रक्रिया का शुरुआती चरण होता है। प्रस्तावित विमान ‘स्टेज-III’ ट्रेनर होंगे, यानी पायलट ट्रेनिंग की अंतिम कड़ी में इनका इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षित पायलटों को ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन में भेजा जाता है।
नए जेट ट्रेनर के जरिए प्रशिक्षु पायलटों को आधुनिक युद्धक विमानों की तकनीक और संचालन से परिचित कराया जाएगा। इनमें एयरबोर्न रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइलों से जुड़ी ट्रेनिंग भी शामिल होगी। इस ट्रेनिंग के बाद पायलट सुखोई-30MKI, राफेल, तेजस और भविष्य के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट उड़ाने के लिए तैयार किए जाएंगे। RFI में भारतीय और वैश्विक विमान निर्माता कंपनियों के हिस्सा लेने की संभावना है।
रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा, जिसमें कंपनियों को तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव देने होंगे। RFP जारी करने के लिए संभावित समय दिसंबर 2027 रखा गया है। अनुबंध लागू होने के बाद 60 महीनों के भीतर विमानों की डिलीवरी पूरी करनी होगी। समयसीमा को देखते नए ट्रेनर विमानों के 2030 के दशक के मध्य से पहले IAF के फ्लाइंग ट्रेनिंग बेस पर पहुंचने की संभावना कम बताई जा रही है। विदेशी कंपनियों को बताना होगा कि वे भारत में कितना उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और सप्लाई चेन क्षमता विकसित कर सकती हैं।
भारत द्वारा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड प्रमुख दावेदार हो सकती है। संभावित विदेशी दावेदारों में इटली की लियोनार्डो, कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज, बोइंग और रूस की याक कंपनी शामिल हो सकती हैं। तकनीकी जांच में सफल विमानों के भारत में फील्ड ट्रायल किए जाएंगे। तकनीकी रूप से योग्य और सबसे कम कीमत वाली बोली लगाने वाली कंपनी को अनुबंध मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हॉक Mk-132 फरवरी 2008 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था और तब से यह IAF के प्रमुख स्टेज-III ट्रेनर के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। अब वायुसेना उससे कहीं अधिक आधुनिक क्षमताओं वाला ट्रेनर चाहती है। इंटरमीडिएट ट्रेनिंग के लिए HAL का HJT-36, जिसे एयरो इंडिया 2025 में ‘यशस’ नाम दिया गया था, लंबे समय से विकास के दौर में है। वहीं HAL का प्रस्तावित सुपरसोनिक HLFT-42 भी हॉक के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन अभी यह क्रिटिकल डिजाइन रिव्यू चरण तक नहीं पहुंचा है।