जालंधर, ENS: नार्दर्न रेलवे बड़ौदा हाउस की ब्रिज वर्कशाप जालंधर कैंट के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) इंचार्ज को रिश्वत मांगने को आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिलिंद कुमार पर आरोप है कि बठिंडा के ठेकेदार हेमंत बांसल से प्रत्येक बिल पर दो प्रतिशत कमीशन की मांग की जा रही थी। रिश्वत न देने पर ठेकेदार के बिलों को पेंडिंग रखा जा रहा था और जानबूझ कर आब्जेक्शन लगाकर व पेनल्टी लगाकर परेशान किया जा रहा था। ठेकेदार का 50 से 60 लाख रुपये के बिल पेंडिंग हैं। यही कारण है कि छह महीने में पूरा होने वाला काम दो साल बाद भी अधूरा है। हेमंत बांसल ने पहले बड़ौदा हाउस में इसकी शिकायत की, जहां से अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर बिलों की जांच कर उन्हें क्लियर करवाने के आदेश दिए।
इसके बावजूद ठेकेदार को परेशान किया जाता रहा। इसके बाद ठेकेदार ने 21 जुलाई को सीबीआइ को शिकायत दी। सीबीआइ की टीम ने 27 जुलाई तक ठेकेदार द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों सहित आडियो- वीडियो क्लिप की जांच की। मिलिंद कुमार और हेमंत बंसल के बीच रिकार्ड की गई बातचीत में शिकायतकर्ता के पहले से भुगतान किए जा चुके बिलों के लिए और लंबित बिलों पर आगे कोई जुर्माना न लगाने के बदले 66,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। दो दिन पहले ब्रिज वर्कशाप में सीबीआई की टीम ने रेड की, जहां से वर्कशाप के इंचार्ज सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिलिंद कुमार को गिरफ्तार कर सात से आठ घंटे तक पूछताछ की गई और मौके पर ही पेंडिंग बिलों सहित जरूरी दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया। केस दर्ज करने के बाद अब चंडीगढ़ में इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह मामले की जांच कर रहे हैं।
हेमंत बांसल के आरोप है कि ब्रिज वर्कशाप में मशीनों सहित अन्य काम डिपार्टमेंट ने उन्हें दिया हुआ है। उनके काम पर नजर रखने के लिए सुपरवाइजर तक तैनात किया गया था। वह काम के साथ-साथ बिल भी जमा करवाते रहे। एसएसई मिलिंद कुमार ने उनसे प्रत्येक पेंडिंग और नए बिलों पर दो प्रतिशत कमिशन देने की मांग की, जिसे देने से उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद एसएसई उनके काम को लटकाते रहे, जो काम उनका छह महीने का था, वो अब दो साल बाद भी अधूरा है। उन्हें प्रत्येक सप्ताह के हिसाब से 11 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाने लगा। वह अब तक 2.64 लाख रुपये जुर्माना दे भी चुके हैं। उन्हें यहां तक कह कर दिया कि वे किसकी परमिशन से ब्रिज वर्कशाप में काम कर रहे हैं? उन्हें कभी कार्य करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं दिया जाता तो कभी 40 फीट तक की ऊंचाई का काम करने के लिए पैड नहीं लगाने देते थे। उनके लगभग 50 से 60 लाख रुपये के बिल पेंडिंग में पड़े हुए हैं।