जालंधर (Ens): पंजाब के चार सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सरकारी सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक कॉलेज में साल 1954 से सरकारी नीतियों और आदेशों के अनुसार चल रहे हैं। इन कॉलेजों में डी.ए.वी. ट्रस्ट का मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज जालंधर, ननकाना साहिब ट्रस्ट का गुरु नानक पॉलिटेक्निक कॉलेज लुधियाना, रामगढ़िया पॉलिटेक्निक कॉलेज, फगवाड़ा और थापर ट्रस्ट का थापर पॉलिटेक्निक कॉलेज शामिल है।
मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जगरुप सिंह ने बताया कि थापर पॉलिटेक्निक कॉलेज ऐसा कॉलेज था जिसने लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद अपनी प्रबंधन समिति के फैसले के अनुसार, सरकार से मिलने वाली राशि को लेना बंद कर दिया था। इसके अलावा अपनी संबद्धता थापर यूनिवर्सिटी के साथ कर ली थी। अब पंजाब में सिर्फ तीन सरकारी सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक कॉलेज ही बचे हुए हैं।
मेहर चंद जैसी संस्था को सरकार से मिलने वाली राशि नहीं मिलेगी तो इसे चलाना मुश्किल होगा क्योंकि डी.ए.वी प्रबंधन के भारत के 21 राज्यों में एक हजार से ज्यादा विद्यालय और महाविद्यालय हैं। ऐसे में उन सभी को खुद अनुदान देना अल्पसंख्यक डी.ए.वी प्रबंधन के लिए आसान नहीं है वहीं थापर ट्रस्ट के अधीन सिर्फ 1-2 संस्थान ही है।
इन कॉलेजों के संचालन हेतु पंजाब सरकार द्वारा 95 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है। ये सभी उच्च गुणवत्ता वाले तथा विद्यार्थियों की पहली पसंद रहे पॉलिटेक्निक कॉलेज हैं और लगभग सात दशकों से पंजाब के लोगों की सेवा कर रहे हैं। शैक्षणिक, खेल, सांस्कृतिक एवं अन्य गतिविधियों में भी इनका सदैव अग्रणी स्थान रहा है। इन कॉलेजों में विद्यार्थियों का प्लेसमेंट भी लगभग 100 प्रतिशत रहा है।
इन तीनों सरकारी सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक कॉलेजों में वर्ष 1999-2000 के बाद किसी भी नियमित स्टाफ की भर्ती नहीं हुई। इन 26 वर्षों में अनेक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं तथा अनेक इस संसार से भी विदा हो चुके हैं। ये प्रतिष्ठित एवं गुणवत्तापूर्ण संस्थान पहले स्वीकृत 95 पदों (जिन पर प्रत्येक वर्ष एडहॉक आधार पर अध्यापक नियुक्त किए जाते थे) के स्थान पर अब मात्र 72 पदों के सहारे चल रहे हैं। ये केवल शिक्षण पद हैं। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के कुछ सीमित पद भी न्यायालयों का सहारा लेने के बाद तथा लंबे संघर्ष के उपरांत वर्ष 2024-25 से ही प्राप्त हुए हैं।
यदि किसी संस्थान को एन.बी.ए. (NBA) से मान्यता (Accreditation) प्राप्त करनी हो, जिसे आजकल ए.आई.सी.टी.ई., नई दिल्ली द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तथा स्वयं को गुणवत्तापूर्ण संस्थानों की श्रेणी में बनाए रखना हो, तो केवल एडहॉक स्टाफ के आधार पर आवेदन करना संभव नहीं है। मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज ने सीमित संसाधनों के बावजूद दो पाठ्यक्रमों में एन.बी.ए. मान्यता प्राप्त की है तथा राष्ट्रीय पुरस्कार भी अर्जित किया है।
तकनीकी शिक्षा के आकाश के ध्रुवतारे के समान स्थापित पंजाब के ये तीन शेष बचे पॉलिटेक्निक कॉलेज ऐसे संस्थान हैं जिनका वार्षिक बजट केवल कुछ करोड़ रुपये है, जो आपकी दूरदर्शी योजनाओं के व्यापक दायरे की तुलना में अत्यंत नगण्य है। इनमें 95 प्रतिशत अनुदान सरकार द्वारा तथा 5 प्रतिशत प्रबंधन द्वारा वहन किया जाता है।
ये कॉलेज वर्षों से न्यायालयों के मामलों में उलझे हुए हैं। ये सदैव पंजाब सरकार की प्रतिष्ठा के प्रतीक रहे हैं। हमें किसी नए भवन या आधारभूत संरचना की आवश्यकता नहीं है; केवल स्टाफ की कमी को पूरा किया जाए तथा सरकारी अनुदान नियमित रूप से जारी किया जाए। वह दिन दूर नहीं जब आने वाले तीन-चार वर्षों में इन प्रतिष्ठित कॉलेजों में एक भी नियमित कर्मचारी शेष नहीं रहेगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर ऐसे शीर्ष संस्थानों की रक्षा की जाए, ताकि पंजाब तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अन्य राज्यों से पीछे न रह जाए।
वर्ष 2024-25 में मेहर चंद पॉलिटेक्निक कॉलेज को केंद्रीय संस्था निट्टर (NITTTR) द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। पूरे भारत के तीन सर्वश्रेष्ठ पॉलिटेक्निक कॉलेजों में इसका चयन हुआ, जिनमें अन्य दोनों संस्थान दक्षिण भारत के हैं। यह पंजाब के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इस कठिन समय में इन कॉलेजों की रक्षा करना सरकार का नैतिक दायित्व और कॉलेज का मूल अधिकार भी है। इन संस्थानों को जीवित बनाए रखने के लिए बार-बार न्यायालयों की शरण लेनी पड़ रही है।