शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा हाल ही में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उनके संबंध में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियां पूरी तरह निराधार एवं तथ्यहीन हैं। उक्त प्रेस वार्ता का वीडियो उन्हें प्राप्त हुआ है, जिसे देखने के बाद उन्होंने इस विषय पर अपनी बात जनता के समक्ष रखने का निर्णय लिया।
नरेश चौहान ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने उनके संबंध में किसी बड़ी डील का आरोप लगाया तथा उनके पुत्र पर हुए जानलेवा हमले और कथित अपहरण के प्रयास को भी उसी तथाकथित डील से जोड़ने का प्रयास किया। इस प्रकार के आरोप अत्यंत गंभीर हैं और बिना किसी तथ्य के किसी व्यक्ति तथा उसके परिवार को इस प्रकार विवाद में घसीटना उचित नहीं है।
उनके पास इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध हैं और शीघ्र ही वे सभी तथ्य सार्वजनिक करेंगे। इसके अतिरिक्त उन्होंने उनके पेशे और कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाने का प्रयास किया है। वर्ष 2003 से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में प्रवक्ता सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। पिछले लगभग 23 वर्षों से उन्होंने पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों और जनहित से जुड़े विषयों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य किया है। इस लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सदैव राजनीतिक मर्यादा का पालन किया है तथा कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध व्यक्तिगत टिप्पणी या आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं की।
प्रदेश के इतने वरिष्ठ नेता, जो पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे हैं और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष हैं, उनसे इस प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति और उसके परिवार को बिना किसी ठोस आधार के विवादों में घसीटना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। यदि नेता प्रतिपक्ष के पास कथित डील अथवा उनके पुत्र पर हुए हमले से संबंधित कोई दस्तावेजी प्रमाण हैं, तो उन्हें तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता के सामने सच्चाई आ सके। साथ ही यदि उनके पेशे, कार्यशैली अथवा कार्यप्रणाली पर किसी प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उससे संबधित तथ्य और प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए ताकि सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने आ सके। इस तरह के निराधार आरोप लगाकर किसी की छवि धूमिल करने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।